नईदिल्ली , 23 जून। भारत जून में एलपीजी आयात करने के मामले में नया रिकॉर्ड बना सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने देश में अमेरिका से 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी आने की उम्मीद है, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर हो सकता है। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत ने वैकल्पिक स्रोतों से खरीद बढ़ा दी है। सरकार इसकी निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।
कुछ समय पहले तक भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से पूरा करता था। देश हर महीने औसतन करीब 20 लाख टन एलपीजी आयात करता है। हालांकि, ईरान-इजराइल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बाद हालात बदलने लगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में एलपीजी आयात घटकर 6.96 लाख टन रह गया था, लेकिन मई में इसमें सुधार आया और यह बढ़कर 11.5 लाख टन तक पहुंच गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में भारत को अमेरिका से 11-12 लाख टन एलपीजी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात से करीब 3-4 लाख टन और कुवैत से लगभग 45 हजार टन एलपीजी आने का अनुमान है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, मई में भारत ने अमेरिका से 6.48 लाख टन और संयुक्त अरब अमीरात से 1.34 लाख टन एलपीजी आयात किया था। आने वाले महीनों में अन्य देशों से भी कुछ अतिरिक्त आपूर्ति मिलने की संभावना है।
सरकार ने तेल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। पाइप्ड गैस कनेक्शन का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में एलपीजी की खपत 15-20 प्रतिशत तक कम करने के विकल्पों पर भी काम शुरू हो चुका है। अगर मध्य पूर्व से सप्लाई सामान्य होने लगती है, तो आने वाले समय में कीमतों और आपूर्ति दोनों में स्थिरता आ सकती है।
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