दोनों युवकों की मौत पर घरों में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
बाराबंकी,23 जून(आरएनएस)। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक कोचिंग सेंटर की इमारत में हुए भीषण अग्निकांड ने बाराबंकी के दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में बाराबंकी के रहने वाले दो युवकों की मौत हो गई, जिससे उनके घरों और मोहल्लों में गहरा मातम पसर गया है। नगर कोतवाली क्षेत्र के लखपेड़ाबाग मोहल्ले (हनफिया मस्जिद के पास) के निवासी अम्मार (24 वर्ष), पुत्र मंसूर आलम, की इस आग की चपेट में आने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, अम्मार लखनऊ की उसी इमारत में कार्यरत थे, जिसमें कोचिंग सेंटर चल रहा था। आग लगने के समय वह भवन के भीतर ही मौजूद थे और गंभीर रूप से झुलस गए थे। हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हुए, लेकिन बाद में अम्मार की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पड़ोसियों ने अम्मार को एक मेहनती और मिलनसार स्वभाव का युवक बताया। इसी अग्निकांड में तहसील फतेहपुर के मोहल्ला काजीपुर निवासी मो. शहजान (19 वर्ष), पुत्र मो. इमरान, ने भी अपनी जान गंवा दी। आग लगने के वक्त शहजान ने अपनी मां नसरीन फातिमा को फोन करके जानकारी दी थी कि बिल्डिंग में आग लग गई है और वह अंदर फंस गया है। सूचना मिलते ही लखनऊ के जानकीपुरम में रह रही उनकी मां रिश्तेदारों के साथ मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और उन्हें अपने बेटे का शव ही मिल सका। पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, शहजान अपने परिवार में तीन बहनों के बीच इकलौते भाई थे। उनके पिता मो. इमरान वर्तमान में दुबई में नौकरी करते हैं। चार भाइयों में सबसे छोटे इमरान ने बच्चों की अच्छी शिक्षा और बेहतर परवरिश के लिए अपने परिवार को फतेहपुर से लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में शिफ्ट किया था। शहजान उस इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित श्हेड हॉपर्स स्टूडियोश् में बतौर प्रशिक्षु (ट्रेनी) ट्रेनिंग ले रहे थे, जहां 3क् आर्ट प्रोडक्शन और गेम आउटसोर्सिंग का काम होता है। उनके चचेरे भाई मो. फैसल ने उनके वहां प्रशिक्षण लेने की पुष्टि की। शहजान की छोटी बहन इरम फातिमा फतेहपुर के लेफ्टिनेंट पीजी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा है, जबकि दो बड़ी बहनोंकृअर्शी फातिमा और रूमाना फातिमाकृका विवाह हो चुका है। इस हादसे की खबर जैसे ही फतेहपुर कस्बे में पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंचने लगे।
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नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक हुआ अम्मार
बाराबंकी। नगर कोतवाली क्षेत्र के लखपेड़ाबाग मोहल्ला निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को गमगीन माहौल में अम्मार को उनके गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बड़े बेटे का जनाजा उठते देख पिता मंसूर आलम पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। लखपेड़ाबाग स्थित हनफिया मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद अम्मार पुत्र मंसूर आलम लखनऊ में उसी भवन में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में कार्यरत थे, जिसमें कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था। आग लगने के समय वह भवन के अंदर मौजूद थे और गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन बदहवास हालत में लखनऊ के लिए रवाना हुए, लेकिन कुछ ही देर बाद अम्मार की मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
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मेहनती, मिलनसार युवा थे अम्मार
परिजनों और मोहल्ले के लोगों के अनुसार अम्मार बेहद मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार युवा थे। परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को वह पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। उनकी असमय मौत से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे मोहल्ले ने अपना एक होनहार बेटा खो दिया। मृतक के पिता मंसूर आलम ने नम आंखों से बताया कि अम्मार उनके परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था। उन्होंने बेटे की शादी तय कर दी थी और अगले वर्ष मार्च में बेटे और बेटी दोनों की शादी करने की तैयारी चल रही थी। बेटे के भविष्य और घर की खुशियों के सपने संजो रहे पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेटे का जिक्र करते-करते उनका गला भर आया और शब्द साथ छोड़ गए। वहीं अम्मार के छोटे भाई उमर ने बताया कि दो दिन की छुट्टी के बाद उनका बड़ा भाई सोमवार को फिर से काम पर गया था। रोजाना दोनों भाइयों की मुलाकात हो जाती थी, लेकिन उस दिन वह सो रहे थे, इसलिए अम्मार से आखिरी बार मुलाकात नहीं हो सकी। यह बात याद करते ही उमर की आंखें छलक उठीं। उन्होंने कहा कि वह बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और उनके बड़े भाई उनकी पढ़ाई से लेकर हर जरूरत में मदद करते थे। भैया मेरे लिए सिर्फ भाई नहीं, पिता समान थे। उनके जाने से मेरी दुनिया उजड़ गई है। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी, यह कहते हुए उमर फफक पड़े।
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मोहल्ले में पसरा मातम
अम्मार की मौत से लखपेड़ाबाग मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि एक मेहनती, जिम्मेदार और उज्ज्वल भविष्य वाले युवक को काल ने समय से पहले छीन लिया। परिवार के सपने, बहन और भाई की उम्मीदें तथा माता-पिता का सहारा एक ही पल में खत्म हो गया, जिससे पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
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