जशपुरनगर, 24 जून (आरएनएस)। संभावित कम वर्षा और एल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को धान पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि टिकरा (अपलैंड) भूमि में धान के बजाय दलहन और तिलहन फसलों की खेती कर किसान मौसम संबंधी जोखिम को कम करने के साथ बेहतर आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई है।
उप संचालक कृषि, जशपुर ने बताया कि कम वर्षा की स्थिति में अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी, रागी, मूंगफली, तिल, रामतिल और कुल्थी जैसी फसलें अधिक उपयुक्त रहती हैं। ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और प्रतिकूल मौसम का प्रभाव भी इन पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। कृषि विभाग के अनुसार दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाती है। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की गारंटी रहती है और बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन और तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी मददगार होती हैं। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे आने वाली फसलों को भी लाभ मिलता है। वहीं इन फसलों का बाजार मूल्य अच्छा होने से किसानों की आय बढऩे की संभावना रहती है। कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले किसानों को भी मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कम अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे फसल खराब होने का जोखिम कम होगा और उत्पादन की संभावना बेहतर बनी रहेगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप फसल चयन करें और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि करें।
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