हिमाचल प्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया सम्मानित, किसानों की आजीविका सुधार और जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को मिली सराहना
लखनऊ 25 जून (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नवीन कुमार अरोड़ा को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पांच बार सांसद रहे अनुराग सिंह ठाकुर ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया।
मानव विकास संस्थान, हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती विषयक कार्यक्रम में प्रो. अरोड़ा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुराग सिंह ठाकुर ने की, जबकि पद्मश्री सम्मान से अलंकृत नेकराम शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा को बिलासपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुदृढ़ करने, किसानों को प्रकृति आधारित कृषि पद्धतियों से जोडऩे तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने क्षेत्र में किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ जैव उर्वरक उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है।इस उपलब्धि पर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने प्रो. अरोड़ा को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक समाज और किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।प्रो. अरोड़ा ने बिलासपुर में जैव उर्वरक उत्पादन इकाई की स्थापना कर किसानों को पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाली खेती की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। इस पहल से स्थानीय किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद मिल रही है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पूर्ण रूप से जैविक और प्राकृतिक खेती आधारित राज्य बनाना सामूहिक लक्ष्य है। इसके लिए किसानों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा जैसे वैज्ञानिकों का अनुभव और शोध किसानों की आय बढ़ाने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में स्थायी और समावेशी विकास को भी गति प्रदान करेंगे। प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बनाए रखती है बल्कि किसानों की लागत कम कर उनकी आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है।अपने संबोधन में प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रही है।उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक नवाचार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसानों की सक्रिय भागीदारी से प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी किसानों के हित में अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से उनका योगदान जारी रहेगा।कार्यक्रम में एक हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान अनुराग सिंह ठाकुर, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, पद्मश्री नेकराम शर्मा, मानव विकास संस्थान के संस्थापक रसम चंदेल तथा विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जागरूक किया।वक्ताओं ने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया, ताकि कृषि उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका तीनों को एक साथ सुदृढ़ बनाया जा सके।
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