0 नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक में सामाजिक एकता, वन संरक्षण और देवस्थलों के संरक्षण पर दिया जोर
रायपुर, 27 जून (आरएनएस)। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर के नव निर्माण में समाज की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। विकास, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए समाज को संगठित होकर आगे आना होगा। उन्होंने यह बात आज नारायणपुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए कही।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद कुछ लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि अब जंगलों की कटाई होगी या बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने समाज प्रमुखों से ऐसे भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने और लोगों को सही जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के नवनिर्माण का जिम्मा अब बस्तर के युवाओं के मजबूत कंधों पर टिका है और सरकार विकास के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर आदिवासी परंपरा का पालन करने वाले लोगों और उससे अलग हो चुके लोगों के बीच अनावश्यक द्वंद की स्थिति बन रही है। यह समाज के हित में नहीं है। समाज प्रमुखों को आगे आकर आपसी वैमनस्य समाप्त करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उप मुख्यमंत्री ने सामाजिक स्थलों एवं देवस्थलों का राजस्व अभिलेखों में चिन्हांकन कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शासन और प्रशासन के सहयोग से देवभूमियों का सफलतापूर्वक चिन्हांकन कराया जा रहा है। इसी तर्ज पर नारायणपुर में भी सभी समाज प्रमुख मिलकर एक समिति का गठन करें, ताकि सामाजिक एवं धार्मिक स्थलों का चिन्हांकन शीघ्र पूरा हो सके और भविष्य में उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। बैठक के दौरान समाज प्रमुखों द्वारा गढिय़ा बाबा के देवस्थल के संरक्षण का विषय उठाए जाने पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने तत्काल बाउंड्री वॉल, नलकूप तथा सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों का संरक्षण समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उप मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण को समाज का साझा दायित्व बताते हुए कहा कि जंगलों को बचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से लघु वनोपजों का संग्रहण एवं दोहन किया जाए तो वन भी सुरक्षित रहेंगे और ग्रामीणों को खेती की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने समाज प्रमुखों से इस विषय पर गांव-गांव लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विजय शर्मा ने कहा कि जैविक कृषि अपनाने से लोगों का खुद का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, भूमि की उर्वरता बनी रहेगी और जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार बस्तर में सहकारी रूप से दुग्ध उत्पादन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अबूझमाड़ की पहाड़ी क्षेत्रों में स्थाई कृषि को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अबूझमाड़ के 10-10 युवाओं का दल बनाकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों का शैक्षणिक भ्रमण कराकर ऊंचाइयों पर खेती के आधुनिक कृषि तकनीक सिखाने को कहा। उन्होंने अबूझमाड़ के ग्रामों में पर्यटन को विकसित करने के लिए होम स्टे विकसित करने को कहा ताकि ग्रामीणों को स्थायी आय का नया माध्यम प्राप्त हो सके। बैठक में समाज प्रमुखों ने क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकास संबंधी समस्याओं और सुझावों से उप मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से ही नक्सल मुक्त बस्तर का समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य तैयार किया जा सकेगा।
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, ओरछा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष मंगलूराम नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, छोटे डोंगर की सरपंच संध्या पवार, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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