सारंगढ़-बिलाईगढ़ 27 जून (आरएनएस) प्रधानमंत्री आवास योजना का सपना जब कागजों में उलझ जाए, तो गांव की चौपाल भी सवालों का अखाड़ा बन जाती है। बिलाईगढ़ विधानसभा के ग्राम पंचायत घोघरा में शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पीएम आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर ग्रामीण इतने नाराज हुए कि ग्राम सभा की बैठक शुरू होने से पहले ही स्थगित करनी पड़ी। गांव में एक ही सवाल गूंजता रहा—”आखिर पात्रों का हक किसकी मेहरबानी से गायब हो गया?”
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक ने करीब 265 परिवारों का सर्वे किया था, लेकिन अंतिम सूची में केवल 108 नाम ही दिखाई दिए। उनका कहना है कि दर्जनों जरूरतमंद परिवारों के नाम बिना वजह बाहर कर दिए गए, जबकि कई ऐसे लोगों को सूची में जगह मिल गई, जिन्हें पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है। आरोप यह भी है कि कहीं पति के बाद पत्नी का नाम जोड़ दिया गया, तो कहीं अविवाहित युवक-युवतियों, नाबालिग बच्चों और संयुक्त परिवार में रहने वाले सदस्यों को अलग-अलग हितग्राही बताकर सूची में शामिल कर लिया गया।
विवाद तब और गहरा गया जब ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रतीक्षा सूची में पूर्व सरपंच महादेव जाटवर का नाम भी दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व सरपंच ने स्वयं सूची में अपना नाम होने की पुष्टि की। वहीं वर्तमान सरपंच नर्सिंग बंजारे ने भी सूची में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि कई वास्तविक पात्र परिवारों के नाम बाहर रह गए हैं, जिससे गांव में नाराजगी बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने पूरी सर्वे सूची और प्रतीक्षा सूची की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा वास्तविक पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। फिलहाल ग्राम सभा स्थगित है और गांव में चर्चा इस बात की है कि अगर सूची ही भरोसेमंद नहीं होगी, तो योजनाओं पर लोगों का भरोसा कैसे टिकेगा? अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच और उसके फैसले पर टिकी हैं।

