लखनऊ 28 जून (आरएनएस )। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की अपराध शाखा की साइबर क्राइम सेल ने देशभर के बेरोजगार युवक-युवतियों को प्रतिष्ठित बैंकों और कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापेमारी कर तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 10 डेबिट कार्ड, फर्जी नियुक्ति पत्रों सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, एक कार और अन्य सामान बरामद किया गया है।पुलिस के अनुसार साइबर क्राइम सेल को लगातार प्राप्त शिकायतों, आईजीआरएस संदर्भों, तकनीकी विश्लेषण और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर जानकारी मिली थी कि थाना विभूतिखंड क्षेत्र में संचालित एक कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के नौकरी तलाशने वाले अभ्यर्थियों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए साइबर सेल ने विभूतिखंड क्षेत्र स्थित सी-71, साईं टावर के निकट संचालित कॉल सेंटर पर छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बलराम तिवारी निवासी हरदोई, शैलेश कुमार उर्फ एचआर शिखर त्रिपाठी निवासी अमेठी तथा नीतेश शर्मा उर्फ एचआर अजीत सिंह निवासी देवरिया के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार बलराम कॉल सेंटर का संचालन करता था, जबकि शैलेश और नीतेश फर्जी एचआर अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करते थे।प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी विभिन्न जॉब पोर्टलों और अन्य माध्यमों से बेरोजगार युवक-युवतियों का डाटा खरीदते थे। इसके बाद स्वयं को नामी बैंकों और कंपनियों का मानव संसाधन अधिकारी बताकर अभ्यर्थियों को फोन करते थे। विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से फर्जी जॉइनिंग लेटर, ऑफर लेटर, कन्फर्मेशन लेटर, जॉब सीकर एग्रीमेंट और अन्य दस्तावेज भेजे जाते थे। इसके बाद पंजीकरण शुल्क, सत्यापन शुल्क, साक्षात्कार शुल्क और प्लेसमेंट शुल्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि जमा कराकर साइबर ठगी की जाती थी।पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे प्रत्येक माह जॉब पोर्टलों से हजारों बेरोजगार अभ्यर्थियों का डाटा खरीदते थे और योजनाबद्ध तरीके से उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर से बरामद मोबाइल नंबरों और आईएमईआई की राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर जांच करने पर देश के विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की अनेक शिकायतें मिली हैं। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपी लंबे समय से इस गिरोह का संचालन कर रहे थे।पुलिस ने बताया कि इससे पहले 12 जून 2026 को भी साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने इसी तरह नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक अन्य फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।इस मामले में थाना विभूतिखंड में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 336(2), 338, 340(2), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य राज्यों में दर्ज शिकायतों की जांच कर रही है।बरामद सामान में छह मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 10 डेबिट कार्ड, दो पासबुक एवं चेकबुक, दो हस्ताक्षरित चेक, एक पहचान पत्र, 213 फर्जी जॉब सीकर एग्रीमेंट, फर्जी जॉइनिंग लेटर, कन्फर्मेशन लेटर, क्लाइंट डाटा शीट, ई-मेल और व्हाट्सएप चैट के प्रिंट, 2,060 रुपये नकद तथा एक मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स कार शामिल है।अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव ने नागरिकों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या संस्था को पंजीकरण, सत्यापन या प्लेसमेंट शुल्क देने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। केवल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत ई-मेल से प्राप्त सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी संदिग्ध व्हाट्सएप संदेश, ई-मेल या क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या ष्4ड्ढद्गह्म्ष्ह्म्द्बद्वद्ग.द्दश1.द्बठ्ठ पर शिकायत दर्ज कराएं।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

