लखनऊ 29 June (Rns) : राज्य में बिजली की नई दरों को लेकर जुलाई के पहले सप्ताह में बड़ा फैसला आ सकता है। इस बार नए टैरिफ में आम जनता को कई बड़ी सहूलियतें देने की तैयारी है। सबसे राहत की बात यह है कि स्मार्ट मीटर लगाने का पूरा खर्च अब उपभोक्ताओं के बजाय खुद बिजली कंपनियों को उठाना पड़ सकता है। स्मार्ट मीटरों को लेकर जनता के बीच भरोसा कायम करने के लिए पारदर्शिता से जुड़े सख्त नियम बनाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा, हेल्पलाइन नंबर 1912 पर दर्ज होने वाली शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा जाएगा।
राज्य की सभी बिजली कंपनियों की तरफ से वर्ष 2024–25 के ट्रू-अप में करीब 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026–27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा दिखाया गया है। कुल मिलाकर करीब 16,448 करोड़ रुपये के इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी की मांग की गई है। इस सिलसिले में विद्युत नियामक आयोग सभी बिजली कंपनियों के साथ जनसुनवाई पूरी कर चुका है। राज्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई के पहले हफ्ते में नई दरों का ऐलान कर दिया जाएगा।
विद्युत नियामक आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके उलट उपभोक्ताओं को कई अन्य मोर्चों पर छूट मिल सकती है। उदाहरण के लिए, जो लोग अपने घरों में छोटी दुकान खोलते हैं, उन्हें कमर्शियल कनेक्शन लेना पड़ता है; इस नियम में ढील दी जा सकती है। वर्तमान में स्मार्ट मीटरों की सटीकता जांचने के लिए 5 फीसदी चेक मीटर लगाए जाते हैं, ताकि यह पता चल सके कि मीटर तेज तो नहीं चल रहा। चूंकि बिजली विभाग इसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, इसलिए आयोग इस पर नई गाइडलाइन जारी कर सकता है। बिजली विभाग चाहता था कि स्मार्ट मीटर का 3,838 करोड़ रुपये का खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जाए, लेकिन इस मांग को खारिज किया जा सकता है। साथ ही, बहुमंजिला सोसायटियों और इमारतों में बिजली कनेक्शन के नियमों को भी आसान बनाने पर विचार हो रहा है।
जुलाई से बदलेगा फ्यूल सरचार्ज की गणना का फार्मूला
प्रदेश में जुलाई महीने से फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) का आकलन नए नियमों के तहत किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा। विद्युत नियामक आयोग ने बिजली खरीद लागत समायोजन की प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली कंपनियों को पूरी व्यवस्था पारदर्शी और नियमानुसार चलाने की हिदायत दी है। आयोग ने माना है कि पिछले 14 महीनों से जिस तरीके से यह गणना की जा रही थी, वह सही नहीं थी। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि उनके प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए आयोग ने पुराने तरीके को गलत माना है।

