14,000 करोड़ का बजट और 125 दिन का रोजगार बना विकास का आधार
जगदीश यादव
कोलकाता 30 जून (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण और बड़े कार्य को अंजाम दिए जाने का समय अब आ गया है। राज्य की नई भाजपा सरकार जहां ग्रामीण इलाकों में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक महात्वाकांक्षी रोजगार गारंटी योजना को पूरी तरह लागू करने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वोटर लिस्ट में हुए हालिया सुधार के बाद सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
इन दोनों ही फैसलों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। एक तरफ जहां 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार और भारी बजट आवंटन को ग्रामीण जनता के लिए मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, वहीं वोटर लिस्ट के आधार पर सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने के फैसले पर विपक्षी दलों के सड़क पर उतरने के आसार
बढ़ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक विवाद बढ़े तो हैरत की बात नहीं होगी। इसी साल एक जुलाई से बंगाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह अब नई केंद्रीय ग्रामीण रोजगार नीति वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर पर काम करेगी। इस नई व्यवस्था के तहत अकेले पश्चिम बंगाल में पहले साल का कुल अनुमानित खर्च 14,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। इस भारी-भरकम बजट से ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सीधे श्रमिकों के खातों में पैसे भेजने (डीबीटी) का लक्ष्य रखा गया है। आवंटित बजट में से 60 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों की सैलरी के लिए तय किया गया है, जबकि बाकी हिस्सा निर्माण सामग्री के लिए इस्तेमाल होगा।
बता दे कि, नए नियमों के अनुसार, चुनाव आयोग के ‘विशेष गहन पुनरीक्षणÓ (एसआईआर) अभियान के तहत जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से अयोग्य या फर्जी पाए जाने के कारण हटा दिए गए हैं, उन्हें अब केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। वहीं इस नीति के तहत, वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के राशन कार्ड को निष्क्रिय करने और उनके मासिक कैश ट्रांसफर या अन्य वित्तीय सहायता पर रोक लगाने का प्रावधान किया जा रहा है।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

