कोण्डागांव 2 जुलाई (आरएनएस) बाहर से सामान्य दिख रही पल्सर बाइक के भीतर ऐसा राज छिपा था, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। सीट और डिक्की में बारीकी से छिपाकर अंतर्राज्यीय स्तर पर गांजा तस्करी की जा रही थी, लेकिन कोण्डागांव पुलिस की सतर्क नाकाबंदी ने पूरे नेटवर्क की एक बड़ी खेप पकड़ ली। कार्रवाई में 10.335 किलोग्राम गांजा, एक पल्सर मोटरसाइकिल सहित कुल 2.70 लाख रुपये का मसरूका जब्त किया गया। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसके साथ मिला एक विधि से संघर्षरत बालक भी कार्रवाई की जद में आया।
पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा (भा.पु.से.) के निर्देश पर जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपील चन्द्रा एवं एसडीओपी रूपेश कुमार के मार्गदर्शन में कोण्डागांव पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि काला-लाल रंग की पल्सर मोटरसाइकिल क्रमांक MP-38 MJ-8492 से उड़ीसा के व्यापारीगुड़ा से मध्यप्रदेश गांजा की खेप ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने एनएच-30 स्थित दूधगांव चौक पर चेक पोस्ट लगाकर सघन नाकाबंदी शुरू कर दी।
चेकिंग के दौरान संदिग्ध बाइक को रोककर तलाशी ली गई। पूछताछ में चालक ने अपना नाम अखिलेश दुबे (33 वर्ष), पिता गंगाराम दुबे, निवासी ग्राम नरहेरा, पोस्ट भडोन, थाना उदयपुरा, जिला रायसेन (मध्यप्रदेश) बताया। उसके साथ एक विधि से संघर्षरत बालक भी सवार था। तलाशी के दौरान पुलिस ने बाइक की डिक्की से 3 किलोग्राम गांजा बरामद किया। जब सीट की जांच की गई तो पुलिस दंग रह गई। सीट के अंदर विशेष रूप से गांजा भरकर उसे सीट कवर से ढंक दिया गया था। कुल बरामद गांजा का वजन 10.335 किलोग्राम निकला, जिसकी अनुमानित कीमत 2 लाख रुपये आंकी गई। इसके साथ करीब 70 हजार रुपये कीमत की मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। कुल जब्ती 2.70 लाख रुपये की रही।
पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 20(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विधिवत गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पूरी कार्रवाई में निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, सहायक उपनिरीक्षक महेश साहू, प्रधान आरक्षक अशोक कुमार मरकाम, सनीत शोरी, आरक्षक मोहन क्षत्रिय, तथा साइबर सेल के सुरेंद्र बघेल, अजय बघेल, संतोष कोडोपी और बिरजू सोरी की विशेष भूमिका रही।
बहरहाल, तस्कर अब पुलिस से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन कोण्डागांव पुलिस की सतर्क निगाहें बता रही हैं कि कानून के शिकंजे से बच निकलना अब आसान नहीं है।

