वाशिंगटन,03 जुलाई। ईरान के साथ हुए युद्ध विराम के बीच अमेरिका ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उसने मध्य पूर्व के देशों से ईरान को सतर्क करने को कहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल युद्ध विराम वार्ता में शामिल ईरान के शीर्ष वार्ताकारों की संभावित हत्या की साजिश रच सकता है, जिससे बातचीत पटरी से उतर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित साजिश में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ निशाना हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि संघर्ष के सबसे तीव्र चरण के दौरान, ईरान की कट्टरपंथी सरकार को गिराने के प्रयास में इजरायल इन दोनों व्यक्तियों को वैध लक्ष्य मान सकता था। हालांकि, अप्रैल में बातचीत शुरू हो गई, जिससे अमेरिका को यह हमला लड़ाई को फिर से भड़काने वाला लगा। अमेरिका इजरायल की युद्ध रणनीति से इतना चिंतित था कि उसने अन्य देशों से ईरान को इस संभावना के बारे में सचेत करने को कहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल हमेशा से शांति वार्ता को लेकर संशय में रहा है। उसे लग रहा था कि अमेरिका युद्ध को रोकने में जल्दबाजी कर रहा है। इजरायली अधिकारियों को आशंका थी कि समझौते के तहत ईरान को अरबों डॉलर मिलेंगे, जिससे वह तेजी से पुनर्निर्माण करेगा और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक नहीं लगेगी। इस बातचीत में अराघची और गलिबाफ केंद्रीय भूमिका में हैं, जिनका पहला उद्देश्य युद्धविराम और फिर अमेरिका के साथ स्थायी शांति स्थापित करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अराघची और गलिबाफ दोनों मार्च से ही इजरायल की लक्ष्य सूची में थे, लेकिन युद्धविराम वार्ता शुरू होने के बाद अमेरिका के आग्रह पर उन्हें सूची से हटा दिया गया था। गालिबाफ 2025 के बाद से 2 बार मौत के मुंह से बाल-बाल बचे हैं। पहली बार पिछले साल के 12 दिवसीय युद्ध के दौरान और दूसरी बार इस साल के संघर्ष की शुरुआत के बाद।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के साथ बातचीत के बाद गलिबाफ के तेहरान लौटते समय हत्या का खतरा उभरा था। ईरानी खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि इजरायल गलिबाफ के विमान को निशाना बनाने की योजना बना रहा था और 2 इजरायली लड़ाकू विमान ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे थे। गलिबाफ के विमान ने पाकिस्तानी सीमा के सबसे नजदीक ईरान के हवाई अड्डे मशहद में आपातकालीन लैंडिंग की और सड़क मार्ग से तेहरान चले गए थे।
अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था, जिसमें सबसे पहले अमेरिका-इजरायल ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार गिराया था। यह हमला अमेरिकी खुफिया जानकारी पर आधारित था। इसके बाद ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी, पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी, खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब और ईरान बल के प्रमुख अब्दुलरहीम मुसावी समेत 10 अन्य को मारा गया। लारीजानी और खराजी के साथ अमेरिका बातचीत की उम्मीद कर रहा था, लेकिन इजरायली हमले में मारे गए।
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