बिलासपुर, 07 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वन संरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए अधिसूचित जंगलों और संरक्षित वन क्षेत्रों से हवाई दूरी के 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने के निर्णय को वैध ठहराया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब इस दायरे में संचालित सभी आरा मिलें बंद रहेंगी। कोर्ट ने इस संबंध में दायर 19 याचिकाओं को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए। अदालत ने माना कि पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा 10 किलोमीटर के बफर जोन का निर्णय उचित और जनहित में है।
दरअसल, राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत अधिसूचना जारी कर अधिसूचित जंगलों एवं संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था। इसके बाद वन विभाग ने इस क्षेत्र में संचालित सभी आरा मिलों को बंद करने तथा उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे।
सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के आरा मिल संचालकों ने हाईकोर्ट में कुल 19 याचिकाएं दायर कर अधिसूचना को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इस फैसले से उनका व्यवसाय प्रभावित होगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने माना कि पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र की सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
इस फैसले के बाद अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर की हवाई दूरी के भीतर आने वाली सभी आरा मिलों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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