जांजगीर, 07 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच जांजगीर की विशेष अदालत ने निवेशकों से ठगी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने विनायक होम्स रियल स्टेट के संचालक जितेंद्र बिषे को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर कंपनी में निवेश कराया, लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी उनकी जमा राशि वापस नहीं की। न्यायालय ने इसे सुनियोजित आर्थिक अपराध मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, वर्ष 2013 में पीडि़त रामकिशुन यादव को आरोपी और उसके सहयोगियों ने कंपनी की आकर्षक निवेश योजना बताई थी। निवेशकों को भरोसा दिलाया गया था कि साढ़े छह वर्ष में उनकी जमा राशि दोगुनी हो जाएगी। इस भरोसे में पीडि़त ने वर्ष 2013 से 2015 के बीच करीब 3.03 लाख रुपये कंपनी में निवेश किए।
निवेश अवधि पूरी होने के बाद जब पीडि़त कंपनी के कार्यालय पहुंचा तो वह बंद मिला। बाद में पता चला कि कंपनी संचालक निवेशकों की रकम लेकर फरार हो गए। शिकायत के आधार पर चांपा थाना में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई—
धारा 420 (पूर्व आईपीसी) के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माना।
इनामी चिट एवं धन परिचालन स्कीम (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 4 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना।
इसी अधिनियम की धारा 5 के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 3 हजार रुपये जुर्माना।
छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये का अर्थदंड।
अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है, इसलिए आरोपी को प्रभावी रूप से 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया।
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