गरियाबंद,09 जुलाईं (आरएनएस)। जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के दावों के बीच गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील से बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां जाली आधार कार्ड के जरिए करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई। हालांकि, ग्राम सरपंच की सतर्कता के चलते जमीन का नामांतरण नहीं हो सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए देवभोग उपपंजीयक कार्यालय के प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार, मामला अमलीपदर तहसील के बजाड़ी ग्राम स्थित खसरा नंबर-12 की करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि से जुड़ा है। यह जमीन 15 अप्रैल 2025 को उरमाल निवासी शांतिलाल जैन के नाम करीब डेढ़ लाख रुपये में रजिस्ट्री की गई थी। लेकिन जब नामांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो ग्राम सरपंच यशोदा नेताम ने विक्रेता की पहचान पर संदेह जताते हुए आपत्ति दर्ज कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति गांव का निवासी नहीं है और जिस जमीन की बिक्री हुई, वह वर्षों से तुकाराम कुम्हार के परिवार के कब्जे में बताई जाती रही है।जांच में खुलासा हुआ कि रजिस्ट्री में उपयोग किया गया आधार नंबर वार्ड क्रमांक-2 निवासी हरिराम नागेश का था, जबकि दस्तावेजों में जमीन बेचने वाले के रूप में भंवरलाल नागेश सामने आया। पूछताछ में भंवरलाल ने स्वीकार किया कि उसने खुद को हरिसिंह बताकर पिता के नाम की समानता का लाभ
उठाया और फर्जी आधार कार्ड तैयार कर जमीन की बिक्री की। उसने खरीदार से चेक के माध्यम से राशि लेकर बैंक खाते से पैसे भी निकाल लिए।प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कथित भूमि स्वामी हरिसिंह नागेश की वर्ष 2018 में मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद जमीन पर कब्जा और स्वामित्व हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई, जो पहले असफल रही। अब फर्जी आधार कार्ड के जरिए रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है।प्रभारी उपपंजीयक अजय चंद्रवंशी ने बताया कि उस समय आधार की ई-केवाईसी व्यवस्था लागू नहीं थी, इसलिए प्रस्तुतकर्ता और गवाह के आधार पर रजिस्ट्री की गई थी। फिलहाल फर्जी आधार तैयार करने, दस्तावेज उपलब्ध कराने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल सभी संबंधित लोगों की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया मामला सुनियोजित कूटरचना और धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है।
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