0-30 दिन में 4 लाख मुआवजा देने के आदेश
बिलासपुर, 10 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतों पर मुआवजा देने की राज्य सरकार की नीति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आंधी-तूफान और तेज बारिश के दौरान पेड़ से गिरकर हुई मौत भी प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आएगी। कोर्ट ने अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा मुआवजा देने से इनकार करने के आदेश को निरस्त करते हुए मृतक के बेटे को 30 दिनों के भीतर चार लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश दिया है।
लाख निकालते समय हुआ था हादसा
मामला राजनांदगांव जिले के मोहला क्षेत्र का है। याचिकाकर्ता अमर सिंह के पिता श्यामूराम मंडावी 16 जुलाई 2020 को पेड़ पर चढ़कर लाख निकाल रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पेड़ से नीचे गिर पड़े। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम सहित सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी।
मुआवजा आवेदन हुआ था खारिज
मृतक के बेटे अमर सिंह ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत 4 लाख रुपये मुआवजे के लिए आवेदन किया था। नायब तहसीलदार ने जांच के बाद मुआवजा देने की अनुशंसा भी की, लेकिन अतिरिक्त कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि पेड़ से गिरने से हुई मौत पर राहत राशि का प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट ने बताया प्राकृतिक आपदा का मामला
अतिरिक्त कलेक्टर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 9 जून 2015 के राजस्व पुस्तक परिपत्र की धारा-6 के अनुसार आंधी-तूफान, अतिवृष्टि या बाढ़ जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण पेड़ या उसकी डाल गिरने अथवा ऐसी परिस्थितियों में हुई मृत्यु को दैवीय आपदा माना जाता है।
हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में भी मौत आंधी-तूफान और तेज बारिश के दौरान पेड़ से गिरने के कारण हुई थी, इसलिए इसे प्राकृतिक आपदा से हुई मृत्यु माना जाएगा।
30 दिन में मुआवजा देने के निर्देश
अदालत ने अतिरिक्त कलेक्टर का आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि का भुगतान किया जाए। यह फैसला प्राकृतिक आपदा राहत नीति की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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