New Delhi 10 Jully /- टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम करने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम से जिस धमाकेदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, वह नए दौर की शुरुआत में ही बिखरता नजर आ रहा है। पहले आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने वाली टीम इंडिया अब इंग्लैंड के हाथों भी सीरीज हार चुकी है। ब्रिस्टल में मिली इस करारी शिकस्त के साथ भारत ने पिछले छह मैचों में अपनी पांचवीं हार झेली है। इसके साथ ही, साल 2018-19 के बाद यह पहली बार हुआ है जब भारत ने लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय सीरीज गंवाई हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इंग्लैंड की टीम ने भारत को खेल के हर विभाग में पीछे छोड़ दिया। ट्रेंट ब्रिज में भारतीय टीम सिर्फ 76 रन पर ढेर हो गई, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में उसका दूसरा सबसे न्यूनतम स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में भारत के 159 रनों के लक्ष्य को इंग्लैंड ने महज 13.5 ओवर में हासिल कर लिया। ऐसे में क्रिकेट गलियारों में यह सवाल उठ रहे हैं कि विश्व चैंपियन बनने के कुछ महीनों बाद ही टीम इंडिया की ऐसी हालत क्यों हो गई? आइए इसके मुख्य कारणों पर नजर डालते हैं…
1. विदेशी परिस्थितियों के अनुसार खुद को न ढाल पाना
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही कि उसके बल्लेबाज आयरलैंड और इंग्लैंड की तेज और सीम मूवमेंट वाली पिचों के मुताबिक अपनी रणनीति में बदलाव नहीं कर सके। आयरलैंड में दोनों मैचों में जरूरत से ज्यादा आक्रामक बल्लेबाजी की कोशिश की गई, जबकि गेंद हवा और पिच से काफी मूवमेंट ले रही थी। ऐसे में विकेट बचाकर पारी को संवारने की बजाय भारतीय बल्लेबाज लगातार बड़े शॉट खेलने के प्रयास में अपने विकेट गंवाते रहे।
टीम चयन और बल्लेबाजी क्रम में निरंतरता की कमी
इस पूरी सीरीज के दौरान टीम कॉम्बिनेशन लगातार बदलता रहा, जिसने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को प्रभावित किया। तिलक वर्मा जैसे प्रतिभावान बल्लेबाज, जिन्होंने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़े हैं, उन्हें निचले क्रम में बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।
हार्दिक पांड्या की अनुपस्थिति में शिवम दुबे की भूमिका भी पूरे दौरे में साफ नहीं दिखी। उन्हें कभी मैच फिनिशर की जिम्मेदारी दी गई, तो कभी शुरुआती दबाव झेलने के लिए ऊपर भेजा गया। श्रेयस अय्यर को छोड़कर लगभग हर भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड के गेंदबाजों की सोची-समझी रणनीति में फंस गया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करने उतरे तिलक वर्मा उस समय बिल्कुल प्रभाव नहीं छोड़ सके, जहां उन्हें पहली ही गेंद से रन बनाने थे, जो उनकी स्वाभाविक शैली नहीं है।
3. गेंदबाजी संयोजन में लगातार फेरबदल
भारतीय टीम प्रबंधन ने इस दौरे पर लगभग हर मुकाबले में अपनी गेंदबाजी यूनिट में बदलाव किए। इस अस्थिरता के कारण गेंदबाजों को अपनी तय भूमिका को समझने और उसमें ढलने का मौका ही नहीं मिल सका। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तान को एक तय और स्थिर बॉलिंग अटैक मिलना चाहिए था, ताकि उसी के आधार पर विपक्षी टीम के खिलाफ रणनीति बनाई जा सकती। बार-बार बदलाव का सीधा असर गेंदबाजों की लय और प्रदर्शन पर दिखाई दिया, जिसका इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने जमकर फायदा उठाया।
साल 2028 में भारत को दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों पर टी20 विश्व कप खेलना है, ऐसे में घरेलू सपाट पिचों पर की जा रही यह तैयारी कितनी लाभदायक होगी, यह एक बड़ा सवाल है। पिछले एक साल में इंग्लैंड ने दो बार भारतीय टीम की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर किया है। पहली बार मोहम्मद सिराज के एक जादुई स्पेल ने उन कमियों को ढक दिया था, लेकिन इस बार ब्रिस्टल में ऐसा कोई चमत्कार देखने को नहीं मिला।
5. विश्व कप वाली खिताबी लय का पूरी तरह गायब होना
साल 2022 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली शर्मनाक हार के बाद भारत ने अपनी टी20 टीम में बड़े और कड़े बदलाव किए थे, जिसका परिणाम यह रहा कि टीम शानदार लय पकड़कर आगे बढ़ने में सफल रही। हालांकि, तब रोहित शर्मा को ही कप्तान रखते हुए एक मजबूत कोर टीम तैयार की गई थी और खिलाड़ियों को लगातार मौके देकर स्थापित किया गया था, जिससे सूर्यकुमार यादव जैसे बल्लेबाज खुलकर सामने आए।
लेकिन इस बार वह आत्मविश्वास और स्पष्ट रणनीति मैदान पर कहीं नजर नहीं आई। साल 2026 में बड़ी जीत के ठीक बाद भारत ने अचानक अपना कप्तान बदल दिया। अगला कप्तान कौन होगा, इसे लेकर कोई दीर्घकालिक योजना नहीं दिखी

