18 वर्ष का होते ही दोहते वासुदीप सिंह ने ननिहाल में किया रक्तदान
10 जुलाई (आरएनएस )। रक्तदान एक सराहनीय और जीवन रक्षक कार्य है, जो समाज में नि:स्वार्थ सेवा और मानवता की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। यह किसी जरूरतमंद के लिये एक बड़ी उम्मीद और नया जीवन बन सकता है। रक्त की एक-एक बूंद जरूरतमंद के लिये जीवन है। यह कहना है सिरसा निवासी व रक्तदान के प्रति अलख जगा रही बिमला कसवां का, जिनके प्रोत्साहन से ही परिवार की तीसरी पीढ़ी में कदम रखने वाले दोहते वासुदीप सिंह भी 18 साल की उम्र होते ही रक्तदान का पुण्य कार्य कर यूथ के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। बिमला कसवां, जोकि पिछले 30 सालों से स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में जाकर रक्तदान के प्रति अलख जगा रही हैं। आज उन्होंने 61वीं बार रक्तदान किया। यही नहीं उनका बेटा अभिमन्यु कसवां व पुत्रवधु शर्मिला भी नियमित रक्तदाता हैं। वासुदीप के नाना भागीरथ सिंह कसवां ने कहा कि वासुदीप जब छोटा था तो एक रक्तदान कैंप के दौरान उसने अपनी जेब पर एक स्टीकर लगाया, जिसपर लिखा था कि मेरे पापा रक्तदाता हैं, क्या आपके पापा भी रक्तदाता हैं। वासुदीप सिंह के इस स्लोगन से न केवल वासुदीप सिंह स्वयं प्रोत्साहित हुआ, बल्कि अन्य लोग भी रक्तदान के प्रति जागरूक हुए। उस समय वासुदीप सिंह ने ठाना था कि 18 साल का होते ही वह सर्वप्रथम रक्तदान अवश्य करेगा। आज वह 18 साल का हुआ और उसने परिवार के साथ शिव शक्ति ब्लड सेंटर में जाकर रक्तदान किया। युवा वासुदीप सिंह ने कहा कि रक्तदान की प्रेरणा उसे अपने परिजनों से मिली, जोकि नियमित रूप से रक्तदान की अलख जगाने के साथ-साथ स्वयं भी रक्तदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खून बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं है, रक्तदान ही इसका एकमात्र विकल्प है। किसी की जिंदगी बचाने के लिये इंसानियत का जज्बा होना जरूरी है। रक्तदान के प्रति लोग खुद जागरूक हो जायें तो किसी को भी खून के लिये भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्तदान को लेकर मन में किसी तरह का डर ना रखें। यह पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। हर स्वस्थ व्यक्ति को वर्ष में कम से कम दो बार रक्तदान जरूर करना चाहिये। उन्होंने कहा कि रक्तदान वह कार्य है, जिससे ना केवल किसी को जीवनदान मिलता है, बल्कि रक्तदाता को भी आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे बिना किसी संकोच के 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर रक्तदान अवश्य करें और नियमित रक्तदाता बनकर जरूरतमंदों की मदद करें।
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