रायपुर,10 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में शुक्रवार को विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों और आवेदनों पर महत्वपूर्ण सुनवाई आयोजित की गई। आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) नेहरू राम निषाद, उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) चन्द्रकान्ति वर्मा और सचिव संकल्प साहू की मौजूदगी में मामलों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर और जशपुर से पहुंचे मलार समाज के 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने की मांग को लेकर सामूहिक आवेदन सौंपा। प्रतिनिधियों ने इस मांग के समर्थन में लिखित सहमति भी प्रस्तुत की। आयोग ने मामले का अवलोकन कर अधिकारियों को नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
गरियाबंद जिले के हरिशंकर साहू द्वारा सामाजिक बहिष्कार की शिकायत पर ग्रामीण साहू संघ (मुरमुरा) के पदाधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि आवेदक को पुन: समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक शामिल कर लिया गया है और इसका प्रमाण-पत्र भी आयोग को सौंपा गया।
वहीं, भू-अधिग्रहण के बदले मिली नौकरी से सेवा समाप्त किए जाने की शिकायत पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने इसे सेवा संबंधी विवाद बताते हुए आवेदक को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में आवेदन प्रस्तुत करने की सलाह दी।
इसके अलावा प्रदीप जायसवाल द्वारा विद्युत कंपनी में पदों की समतुल्यता और ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए गए, जिस पर आयोग ने क्रीमीलेयर के लिए समतुल्यता निर्धारण संबंधी विषय पर राज्य शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में पक्षकारों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें अगली तिथि पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। आयोग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पिछड़ा वर्ग से जुड़े सभी मामलों का संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
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