बिलासपुर,11 जुलाईं (आरएनएस)। शहर के अपोलो अस्पताल में मरीज को एयर एंबुलेंस से समय पर रेफर नहीं किए जाने के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। पूर्व मेयर एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की मौत के मामले को लेकर पहले से विवादों में घिरे अस्पताल पर अब एक और गंभीर आरोप सामने आने के बाद रायपुर और बिलासपुर से पहुंची संयुक्त जांच टीम अस्पताल के विभिन्न रिकॉर्ड और चिकित्सा व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रही है।स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल में भर्ती एवं उपचार प्रक्रिया, मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड, दस्तावेजों तथा वित्तीय अभिलेखों की जांच कर रही है। अधिकारियों द्वारा विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाकर अस्पताल की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जा रहा है। इधर, कांग्रेस ने भी मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।क्या है एयर एंबुलेंस विवादमामला पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, कोलकाता यात्रा से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगडऩे पर उन्हें चार दिन पहले अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी, जिसके बाद परिजनों ने करीब 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस बुक कराई, जो बुधवार शाम चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई।परिजनों का आरोप है कि एयरपोर्ट तक मरीज को ले जाने के लिए अस्पताल ने अपनी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई, जबकि परिसर में एंबुलेंस मौजूद थीं। उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा गया। आरोप यह भी है कि मरीज के साथ अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ नहीं भेजा गया। एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की हालत बिगडऩे पर एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने उसे हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया और मरीज को वापस अस्पताल लाना पड़ा।इसके बाद अस्पताल ने मरीज के लिए विशेष फेफड़ा (लंग्स) सपोर्ट सिस्टम अर विशेषज्ञ मेडिकल टीम की आवश्यकता बताई। गुरुवार को हैदराबाद से तीन सदस्यीय मेडिकल टीम बिलासपुर पहुंची और पूरे दिन उपचार के बाद शाम को मरीज को दोबारा एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया। इस बार भी निजी एंबुलेंस का उपयोग किया गया, लेकिन हैदराबाद से आई टीम ने पहले एंबुलेंस और चिकित्सा व्यवस्था का निरीक्षण करने के बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी।परिजनों के अनुसार, अब तक अस्पताल में इलाज पर 2.87 लाख रुपये, एयर एंबुलेंस बुकिंग पर 13 लाख रुपये, अतिरिक्त हैंडलिंग शुल्क और विशेषज्ञ टीम व उपकरणों पर करीब 9 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस तरह उपचार और स्थानांतरण पर कुल खर्च लगभग 23 लाख रुपये तक पहुंच गया है।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
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