नई दिल्ली,11 जुलाई(आरएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान के नए निर्देश का तमिलनाडु की सत्ताधारी गठबंधन सरकार ने विरोध किया है. नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार राष्ट्रगान (नेशनल सॉन्ग) से पहले तमिल थाई वाझथु गाने की अपनी पुरानी परंपरा जारी रखेगी और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाने से मना कर देगी.
गृह मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक आदेश में, नेशनल सॉन्ग और नेशनल एंथम गाने और बजाने के लिए प्रोटोकॉल तय किए. उन राज्यों का जिक्र करते हुए जो आधिकारिक कार्यक्रमों में अपना राज्य गीत भी गाते हैं, मंत्रालय ने कहा कि जब भी कोई स्टेट सॉन्ग(राजकीय गीत), नेशनल सॉन्ग (राष्ट्रीय गीत) और नेशनल एंथम (राष्ट्रगान) के साथ गाया या बजाया जाएगा, तो पहले राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान होगा.
इस शब्द ने तमिलनाडु में राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जहां पारंपरिक रूप से सरकारी कामों की शुरुआत में तमिल थाई वाझ्थु का इस्तेमाल किया जाता है. विदुथलाई चिरुथैगल काची के सांसद डी रविकुमार ने कहा कि, वे लोग नेशनल सॉन्ग नहीं गाएंगे. हम पहले अपना राज्य गीत गाएंगे, उसके बाद राष्ट्रगान. राष्ट्रगान सिर्फ गवर्नर के कार्यक्रमों के दौरान ही गाया जाता है.
इस विवाद ने उसी तरह के विवाद को फिर से जिंदा कर दिया है जो मई में एक्टर से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के दौरान हुआ था, जब राज्य के पुराने रिवाज से हटकर, पहले वंदे मातरम बजाया गया, उसके बाद जन गण मन, और आखिर में तमिल थाई वाज़्थु गाया गया. इस सीन की डीएमके के गठबंधन नेताओं ने कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि तमिल प्रार्थना गीत हमेशा पहले बजाया जाना चाहिए.
विरोध के बाद विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम ने अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाया कि सरकारी कामों में राष्ट्रगान से पहले तमिल थाई वाज्थु बजाया जाएगा. टीवीके सरकार को कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियों, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का समर्थन प्राप्त है.
हालांकि, संवैधानिक एक्सपर्ट एसपी सिंह ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रगान और राष्ट्रगान से जुड़े प्रोटोकॉल का एक जैसा पालन करना चाहिए. सिंह ने बताया कि, भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक ही प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.
हालांकि केंद्र का कहना है कि यह आदेश राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के लिए प्रोटोकॉल को संहिताबद्ध (नियमों के रूप में व्यवस्थित करना) करता है. लेकिन राज्य के गानों के संदर्भ ने तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक दरार पैदा कर दी है, जहां सरकारी कामों में तमिल थाई वाज़्थु की जगह एक बहुत भावनात्मक मुद्दा बना हुआ है.
गृह मंत्रालय के आदेश में यह भी दोहराया गया है कि, नेशनल सॉन्ग और नेशनल एंथम दोनों गाते समय आधिकारिक रूप से तय गीत के बोल (लिरिक्स) और सही उच्चारण का पालन किया जाना चाहिए.
अधिसूचना के मुताबिक, नेशनल सॉन्ग नागरिक अलंकरण के दौरान, औपचारिक राज्य कार्य में राष्ट्रपति के आने और जाने पर, ऑल इंडिया रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्रपति के देश के नाम संबोधन से पहले और बाद में, औपचारिक राज्य कार्य में गवर्नर और लेफ्टिनेंट गवर्नर के आने और जाने पर, जब नेशनल फ्लैग परेड में लाया जाएगा, और भारत सरकार द्वारा खास तौर पर सूचित किए गए किसी भी दूसरे मौके पर बजाया जाएगा.
आदेश में कहा गया है कि नेशनल एंथम सिविल और मिलिट्री इंवेस्टीचर (सैन्य अलंकरण समारोह), औपचारिक राष्ट्रीय सलामी, परेड, आधिकारिक समारोह में राष्ट्रपति और गवर्नर के आने और जाने पर, राष्ट्रपति के राष्ट्रीय प्रसारण से पहले और बाद में, जब नेशनल फ्लैग परेड में लाया जाएगा, रेजिमेंटल कलर्स की प्रेजेंटेशन के दौरान और नेवल कलर-होइस्टिंग सेरेमनी के दौरान बजाया जाएगा.
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