लखनऊ 13 जुलाई (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश की चिकित्सा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की दूरदर्शी मुहिम अब धरातल पर बड़े और ऐतिहासिक परिणाम दिखाने लगी है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही महानगरों जैसी उच्च स्तरीय और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटरÓ योजना डॉक्टरों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों को दिए जा रहे व्यावहारिक और ‘हैंड-ऑन प्रशिक्षणÓ (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) ने उनके भीतर के आत्मविश्वास को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है।
पहले जिन जटिल और जोखिम भरे मामलों को देखकर डॉक्टर घबरा जाते थे, अब प्रदेश के सुदूर और छोटे जिलों के सरकारी चिकित्सक गंभीर एनीमिया (खून की अत्यधिक कमी) और अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) जैसे बेहद पेचीदा और हाई रिस्क प्रसव के मामलों को बड़े मेडिकल कॉलेजों या लखनऊ के लिए रेफर करने के बजाय स्थानीय जिला अस्पतालों में ही पूरी तरह सुरक्षित और सफल तरीके से खुद संभाल रहे हैं। इससे न केवल गरीब मरीजों का पैसा बच रहा है, बल्कि समय पर इलाज मिलने से जच्चा-बच्चा की जान भी सुरक्षित हो रही है।
इस क्रांतिकारी स्वास्थ्य मॉडल की तकनीकी और प्रशासनिक बारीकियों को साझा करते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने एक विशेष प्रेस वार्ता में बताया कि पूर्व के वर्षों में जिला स्तर पर डिग्रियां और योग्यता होने के बावजूद डॉक्टरों के भीतर कुछ गंभीर आपातकालीन स्थितियों (जैसे शॉक लगना, प्रसव पूर्व अत्यधिक रक्तस्राव या एंटी पार्टम हैमरेज, और प्रसव में होने वाली लंबी व असहनीय पीड़ा) को अकेले संभालने के व्यावहारिक आत्मविश्वास की भारी कमी थी। इसी झिझक के कारण डॉक्टर किसी भी जोखिम से बचने के लिए मरीजों को तत्काल हायर सेंटर रेफर कर देते थे, जिससे रास्ते में ही कई महिलाओं की मौत हो जाती थी।
प्रथम चरण की रणनीति: योजना के पहले चरण के तहत राज्य के 20 शीर्ष और अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेजों को आरआरटीसी सेंटर के रूप में तब्दील किया गया। इन सेंटरों के माध्यम से उनके आसपास से जुड़े जिलों के डॉक्टरों की कार्यक्षमता और कौशल को बढ़ाने का काम किया गया।
द्वितीय चरण का हाइब्रिड मॉडल: वर्तमान में चल रहे दूसरे चरण के तहत डॉक्टरों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि हाइब्रिड और पूरी तरह से व्यावहारिक माध्यमों से सीधे वरिष्ठ विशेषज्ञों की देखरेख में लाइव प्रसव और ऑपरेशनों की ट्रेनिंग दी जा रही है।
सीतापुर: जिला महिला अस्पताल बना सफलता का सबसे बड़ा रोल मॉडल; 3 महीने में कराए 2218 हाई रिस्क प्रसव
इस विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण का सबसे अचंभित करने वाला और सुखद परिणाम सीतापुर जिला महिला अस्पताल में देखने को मिला है, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है:
5 डॉक्टरों का अद्भुत कारनामा: सीतापुर जिला अस्पताल में इस योजना के तहत ट्रेनिंग पाकर लौटे महज 5 डॉक्टरों की टीम ने पिछले 90 दिनों (तीन महीनों) के भीतर कुल 2218 अत्यंत गंभीर और उच्च जोखिम वाले प्रसवों को बिना किसी बड़े मेडिकल कॉलेज में रेफर किए शत-प्रतिशत सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
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