-कहा-जब आईएएस, आईपीएस व पीसीएस नियुक्ति के 25 वर्ष बाद नहीं देते कोई परीक्षा तो शिक्षक के ऊपर टीईटी लागू क्यों
अयोध्या 14 जुलाई (आरएनएस)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद अयोध्या का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी व जिला मंत्री डॉक्टर चक्रवर्ती सिंह के नेतृत्व में सोमवार को स्थानीय सांसद अवधेश प्रसाद के पास पहुंचा। सैकड़ो शिक्षकों का हुजूम लेकर अयोध्या जनपद के सभी ब्लॉको के शिक्षकों व पदाधिकारी के साथ अयोध्या लोकसभा सांसद के पास पहुंचकर एनसीटीई द्वारा 23 अगस्त 2010 को निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक अर्हता के पैरा चार को संसद द्वारा पारित कराकर निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम में सम्मिलित करने के संबंध में ज्ञापन दिया गया ज्ञापन में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी ने बताया कि निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 दिनांक 27 अगस्त 2009 को प्रकाशित किया गया है इस अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति को शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए न्यूनतम योग्यता का निर्धारण अधिनियम में किया गया है इससे इतरअन्य परीक्षा का थोपा जाना शिक्षकों का उपहास व उत्पीडऩ है निशुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 मे अगस्त 2017 को किए गए संशोधन के द्वारा शिक्षक के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है जबकि अन्य किसी विभाग में चाहे वह आइ ए एस, आई पी एस हो या पी सी एस हो या अन्य विभाग में किसी अन्य पद पर हो ,20 से 30 वर्ष की सेवा के उपरांत कोई अन्य परीक्षा सेवा में बने रहने के लिए नहीं लागू है ऐसी स्थिति में शिक्षकों के ऊपर लागू की गई परीक्षा को कानून बनाकर निरस्त किया जाए। जिससे संबंधित ज्ञापन सासद को सोपा गया। वहीं जिला मंत्री डॉ चक्रवर्ती सिंह ने कहा जिस प्रकार कानून के क्षेत्र में वकालत करने हेतु एल एल वी एक प्रोफेशनल डिग्री है उसी प्रकार स्कूली शिक्षा में अध्यापन करने हेतु बेड बीटीसी एक प्रोफेशनल डिग्री है कानून के क्षेत्र में एल एल बी के साथ अधिवक्ता के रूप में कार्य अनुभव के आधार पर अधिवक्ताओं को माननीय उच्च न्यायालय में माननीय जस्टिस से लेकर सुप्रीम कोर्ट में माननीय मुख्य न्यायाधीश तक नियुक्ति एवं पदोन्नति दी जाती है तथा सेवा के मध्य में कोई भी परीक्षा नहीं उत्तीर्ण उत्तीर्ण करनी होती , ऐसी स्थिति में बीएड बीटीसी की डिग्री के साथ अगर 25 से 30 वर्षों से अध्यापन कर रहे अनुभवी अध्यापकों को सेवा में बने रहने हेतु सेवा के मध्य में टे ट (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के साथ अन्याय है जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट पूर्व में एक आदेश में स्पष्ट कर चुका हैं कि खेल के नियम बीच में नहीं बदले जाएंगे जिससे जिले के शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है ।उसी क्रम में प्रांतीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा के निर्देशन में अयोध्या जनपद के सैकड़ो शिक्षकों ने भारी हुजूम के साथ ज्ञापन सौंप कर संसद के माध्यम से शिक्षकों के हित में टी ई टी से मुक्ति हेतु कानून पारित कराए जाने की मांग की गई ।ज्ञापन देने वालों में प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष रामानुज तिवारी संतोष यादव ब्लॉक अध्यक्ष अविनाश पांडे
सत्येंद्र पाल सिंह, अनुज सिंह समीर सिंह ,डॉक्टर सिकंदर सिंह ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव आलोक यादव भगवती यादव सत्येंद्र गुप्ता अध्यक्ष पूरा अनिल सिंह विजय शुक्ला पप्पू कुमार संतोष वर्मा संचराज वर्मा अमरेंद्र सिंह ,नागेंद्र सिंह ,मृत्युंजय शरण गौर , कुंवर आनंद सिंह विद्या यादव राजेश कुमार राजेश प्रदीप सिंह ,विजय तिवारी, नवनीत आवेश कुमार कृष्ण प्रताप आदि आदि सैकड़ो शिक्षक उपस्थित रहे।
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