वाशिंगटन,15 जुलाई। अमेरिकी सीनेटरों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य भारत और चीन समेत उन देशों पर दबाव डालना है, जो रूस से तेल खरीदते हैं, लेकिन प्रस्ताव में कुछ राहत भी है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सीनेटरों की ओर से विधेयक के अद्यतन संस्करण में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अधिकतम टैरिफ को 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जो पहले 500 प्रतिशत था। विधेयक अगस्त से पहले पारित हो सकता है।
यह विधेक मूल रूप से दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने एक साल पहले पेश किया था, जिसे दोनों दलों रिपब्लिकन और डेमोक्रेट का समर्थन प्राप्त है।
ग्राहम का शनिवार को अचानक निधन हो गया, जिन्होंने मौत से एक दिन पहले यूक्रेन यात्रा के दौरान घोषणा की थी कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए समझौता कर लिया है।
संशोधित संस्करण के पारित होने की संभावना अधिक स्पष्ट है।
पहले के विधेयक में रूसी तेल खरीदारों पर 500 प्रतिशत एकमुश्त अधिकतम टैरिफ का प्रस्ताव था, जिसे संशोधित विधेयक में घटाकर 100 प्रतिशत किया गया है।
टैरिफ मुख्य रूप से दुनिया के शीर्ष 5 रूसी तेल खरीदार देश चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर लगेगा, जबकि रूसी प्राकृतिक गैस के प्रमुख आयातकों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम शामिल हैं।
संशोधित विधेयक में अमेरिकी हित को देखते हुए राष्ट्रपति को प्रतिबंधों को माफ करने की भी शक्ति है।
अमेरिकी संशोधित विधेयक में प्रतिबंधों का उद्देश्य उस राजस्व प्रवाह को कम करना है जो यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को लगातार वित्त पोषित कर रहा है।
विधेयक में रूस के तथाकथित अदृश्य टैंकर बेड़े को भी निशाना बनाया गया है, जिसका उपयोग मॉस्को पारंपरिक पश्चिमी शिपिंग और बीमा नेटवर्क से बाहर तेल परिवहन के लिए करता है।
विधेयक में उन देशों को छूट मिलेगी, जो रूस से अपनी प्राकृतिक गैस आपूर्ति का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं।
००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

