कोलकाता 15 Jully (Rns) । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने टीएमसी का साथ छोड़ते हुए पार्टी के बागी गुट का दामन थाम लिया है। उन्होंने बागी नेता रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए अपने नए राजनीतिक सफर की घोषणा की।
बुधवार को मदन मित्रा स्वयं वाहन चलाकर पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे, जहां उन्होंने रितब्रता बनर्जी से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने टीएमसी से अलग होने का ऐलान करते हुए बागी गुट में शामिल होने की घोषणा कर दी।
इससे एक दिन पहले मंगलवार रात मदन मित्रा अचानक एंटाली के पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा के आवास पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। स्वर्णकमल साहा के पुत्र संदीपन साहा, जो एंटाली से विधायक हैं, बागी गुट के प्रमुख नेताओं में माने जाते हैं। राजनीतिक जानकारों ने इसे मदन मित्रा के बदलते रुख का संकेत माना था।
मदन मित्रा टीएमसी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं तथा राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके बागी गुट में शामिल होने से पार्टी की आंतरिक राजनीति पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इधर, मदन मित्रा नगर भर्ती घोटाले से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के रडार पर भी हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके आवास पर तलाशी ली थी, जबकि इस वर्ष जून में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनके घर पर छापेमारी की थी। हाल ही में ईडी ने इस मामले में उनकी पत्नी और दोनों बेटों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है।
परिवार को समन मिलने और उसके बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। विपक्ष इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतोष की निशानी बता रहा है, जबकि पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है

