नई दिल्ली 15 Jully (Rns) । केंद्र सरकार ने देश को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0’ को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के व्यय को स्वीकृति प्रदान की गई।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई योजना के माध्यम से देश में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही योजना की अवधि के दौरान करीब 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के सेमीकंडक्टर उत्पादन का अनुमान है।
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला को विकसित किया जाएगा। इसमें खनिज, गैस और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।
मंत्री वैष्णव ने कहा कि इस मिशन के छह प्रमुख स्तंभ होंगे, जिनमें पहला स्तंभ स्वदेशी चिप डिजाइन पर केंद्रित रहेगा। योजना का उद्देश्य भारत में चिप के डिजाइन, विकास और निर्माण की पूरी क्षमता विकसित करना है, ताकि भविष्य में देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 के लिए सरकार ने 76 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसके तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक निवेश टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी सेमीकंडक्टर इकाई की ओर से किया गया है।
सरकार का मानना है कि नई योजना वैश्विक स्तर पर चिप की बढ़ती मांग, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरणों के लिए आवश्यक सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित कर सकेगा।

