नई दिल्ली, 15 जुलाई (आरएनएस)। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज़ के बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सोज़ के बयान को भाजपा ने “भारत विरोधी” और “निंदनीय” करार देते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी के लौटते ही कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता द्वारा दिया गया यह बयान देश की संप्रभुता और एकता पर सीधा हमला है। सैफुद्दीन सोज़ ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर का मामला केवल राज्य का दर्जा बहाल करने या अनुच्छेद 370 को वापस लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह *”दाखिली खुदमुख्तारी”* यानी *”संप्रभुता”* का विषय है। उन्होंने इसे इस आधार पर भी जोड़ा कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है और इसे अपनी शर्तों पर भारत के साथ रहना चाहिए। सोज़ के इस बयान के बाद भाजपा ने इसे अलगाववादी सोच को हवा देने वाला बताया। पार्टी का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से न केवल जम्मू-कश्मीर में शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि देश विरोधी तत्वों को भी बल मिलेगा। इस पूरे मामले पर भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से दो स्पष्ट सवाल पूछे हैं। पहला सवाल राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से है कि क्या सैफुद्दीन सोज़ का यह बयान कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक लाइन है? दूसरा सवाल यह है कि यदि यह पार्टी की लाइन नहीं है, तो क्या कांग्रेस इस बयान की *सार्वजनिक रूप से निंदा* करेगी और सैफुद्दीन सोज़ के खिलाफ *अनुशासनात्मक कार्रवाई* करेगी? भाजपा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम फैलाना राष्ट्रहित के खिलाफ है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जानबूझकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को राज्य के दर्जे और धारा 370 से आगे बढ़ाकर “संप्रभुता” जैसे संवेदनशील शब्दों से जोड़ रही है। पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में विकास, रोजगार और शांति के लिए लगातार काम कर रही है, ऐसे समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस तरह के बयान देकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि देश की जनता यह जानना चाहती है कि कांग्रेस की वास्तविक नीति क्या है। क्या कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को लेकर सोज़ जैसी सोच का समर्थन करती है या वह इससे किनारा करती है। अब सभी की नजरें कांग्रेस नेतृत्व के जवाब पर टिकी हैं। भाजपा ने कहा है कि राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कांग्रेस को अपना रुख तुरंत स्पष्ट करना चाहिए।
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