नई दिल्ली,15 जुलाई(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाई कोर्ट के हाल के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (डीएमके) नेता ईवी वेलु के खिलाफ करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी.
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच के सामने आया. बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट पहले ही वेलु को जांच में शामिल होने का निर्देश दे चुका है. सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु सरकार की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने एक रद्द करने वाले मामले में गिरफ्तारी पर पूरी तरह रोक लगा दी, जबकि इसके लिए कोई खास प्रार्थना भी नहीं की गई थी.
वेलु की ओर से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि, तमिलनाडु में सत्ता बदलने के बाद उनके मुवक्किल पर मुकदमा चलाया जा रहा था. रोहतगी ने दलील दी कि तमिलनाडु में सत्ता बदलने के बाद उनके मुवक्किल पर मुकदमा चलाया जा रहा था, उन्होंने कहा कि सरकार बदलते ही एफआईआर दर्ज की गईं और आगे और भी होंगी.
इस पर बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि डीएमके-सरकार ने सत्ता में रहते हुए भी ऐसी ही कार्रवाई की होगी. बेंच ने कहा, आपने पहले भी यही किया है. इसमें गलत क्या है. बेंच ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि ऐसे एक्शन सही कानूनी सलाह के बाद लिए जाते हैं. सिंघवी ने कहा कि, पिछली सरकार ने शिकायत पर केस चलाने की इजाजत नहीं दी थी. दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने कहा कि वह इस अर्जी पर सुनवाई नहीं करना चाहती.
इस महीने की शुरुआत में, हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर पर इस शर्त पर रोक लगा दी थी कि वह 15 जुलाई को जांच अधिकारी के सामने पेश होंगे. इस बीच, उन्हें 28 जुलाई तक किसी भी जबरदस्ती की कार्रवाई से सुरक्षा दी गई थी.
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