प्रयागराज/रायपुर, 16 जुलाईं (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल किसी आरोपी के आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका हो या उसके फरार होने की संभावना हो।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि जमानत का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी ट्रायल के दौरान अदालत के समक्ष उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि निरंजन दास जांच में बाधा डाल सकते हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केवल आपराधिक इतिहास को आधार बनाकर जमानत देने से इनकार करना उचित नहीं है।
2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा मामला
अभियोजन के अनुसार, निरंजन दास पर आरोप है कि छत्तीसगढ़ के आबकारी आयुक्त रहते हुए उन्होंने ऐसी आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार की, जिससे नोएडा स्थित एम/एस प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचा। आरोप है कि नकली होलोग्राम के माध्यम से कथित शराब घोटाले को अंजाम दिया गया।
इस मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश में मामला इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि कथित तौर पर शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले होलोग्राम की छपाई नोएडा में हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी है राहत
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ में दर्ज मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट मई 2026 में निरंजन दास को पहले ही जमानत दे चुका है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कथित आर्थिक नुकसान छत्तीसगढ़ में हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश में जांच पूरी हो चुकी है और 22 गवाहों के साथ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
इन परिस्थितियों और ट्रायल लंबा चलने की संभावना को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरंजन दास की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत प्रदान की।
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