0-बोले-कांग्रेस में कुर्सी की लड़ाई खत्म नहीं हो रही
जालंधर,17 जुलाई(आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के दौरे पर हैं। जालंधर से उन्होंने 5,470 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों सहित रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने अमृतसर-वाराणसी संत रविदास एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरे को 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के अभियान का आगाज माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आम आदमी पार्टी (्र्रक्क), कांग्रेस और अकाली दल भी निशाना साधा।
प्रधानमंत्री ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 75 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया। इसकी लागत लगभग 1,570 करोड़ रुपये है।
830 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दौलतपुर चौक-करटोली नई रेल लाइन का उद्घाटन किया।
उन्होंने 3,070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया।
4 लेन वाले ग्रीनफील्ड दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज 6 का उद्घाटन किया।
25.2 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड दक्षिणी लुधियाना बाईपास का शिलान्यास।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, यहां कांग्रेस का भी अपना रोना धोना चल रहा है। इनका तो कुर्सी का किस्सा खत्म नहीं हो रहा है। पंजाब में कांग्रेस लोगों के हितों के बारे में नहीं सोच रही है। सोच रही है कि कुर्सी किसकी होगी। कांग्रेस सरकार नई ट्रेनों की झूठी घोषणा करके आराम से बैठ जाती थी। हमारे रेलवे स्टेशनों को कांग्रेस ने अपने हाल पर छोड़ दिया था। अकाली दल का भी यही हाल है।
प्रधानमंत्री ने कहा, पंजाब की सरकार केंद्र की योजनाओं को लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही। केंद्र ने लाखों करोड़ यहां के लोगों को विकास के लिए भेजे, लेकिन पंजाब सरकार ने इस पैसे को सही जगह खर्च नहीं किया। ये सरकार कर्ज के पैसे पर चल रही है। पंजाब के नाम पर कर्ज लिया जा रहा है। आज पंजाब में जो पार्टी है उसकी नीयत कट्टर बईमान की है। वसूली-उगाही इनकी राजनीति का ट्रेड मार्क बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा, पंजाब में आज क्या हो रहा है ये किसी से नहीं छिपा है। नशा चरम पर है, कारोबार करना मुश्किल हो गया है। कब कहां गोलियां चल जाएं पता नहीं। पुलिस थाने तक सुरक्षित नहीं है। नशे के सौदागर खुले घूम रहे हैं। युवाओं को नशे में धकेला जा रहा है। यहां आयुषमान योजना में खेल खेला जा रहा है। सरकार की न तो नीयत साफ है और न ही उसकी पहचान ईमानदार राजनीति से जुड़ी है।
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