० भूसारास पंचायत के बूरुगंपारा में निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल; उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
दंतेवाड़ा, 22 जुलाई (आरएनएस)। कटेकल्याण विकासखंड की ग्राम पंचायत भूसारास के आश्रित ग्राम बूरुगंपारा में सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्टॉप डैम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य एवं महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तुलिका कर्मा ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से किसानों के हित में स्वीकृत परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने तुलिका कर्मा को बताया कि निर्माण कार्य के समय से ही वे लगातार ठेकेदार, मुंशी और विभागीय अधिकारियों को घटिया सामग्री के उपयोग तथा तकनीकी खामियों की जानकारी देते रहे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों की अनदेखी कर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया।
निरीक्षण में सामने आईं कई तकनीकी खामियां
तुलिका कर्मा ने निरीक्षण के बाद कहा कि मौके पर देखने से स्पष्ट प्रतीत होता है कि स्टॉप डैम के किनारों पर आवश्यक रिटर्निंग वॉल का निर्माण नहीं किया गया। वहीं निर्माण के दौरान प्रयुक्त लोहे की छड़ें (रॉड) भी कई स्थानों पर खुले और नुकीले रूप में बाहर दिखाई दे रही हैं, जिन्हें हटाया नहीं गया। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डैम की निर्धारित ऊंचाई में भी कमी की गई है, जिससे भविष्य में परियोजना की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की होगी।
भ्रष्टाचार को प्रदेश स्तर तक उठाऊंगी: तुलिका कर्मा
तुलिका कर्मा ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए स्वीकृत यह परियोजना कथित रूप से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को प्रदेश स्तर तक उठाया जाएगा और उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्टॉप डैम निर्माण के दौरान जिन किसानों की कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित मुआवजा दिलाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तो परियोजना की वास्तविक गुणवत्ता सामने आ जाएगी। उनका कहना है कि किसानों के हित में स्वीकृत करोड़ों रुपये की इस परियोजना में यदि अनियमितताएं हुई हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।
अब पूरे मामले में निगाहें सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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