० ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग,जो कि गांवों के आधारभूत ढांचे के निर्माण में रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, आज खुद भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी है
० शासकीय भवन अहाता निर्माण,नाली,पुल-पुलिया,सीसी रोड निर्माण एवं मरम्मत,सामुदायिक भवन,शेड निर्माण में भारी भ्रष्टाचार
साजा, 08 नवम्बर (आरएनएस)। आरएसएस विभाग अनुविभाग साजा में एक ऐसे इंजिनियर है जो विभाग मे अभियंता कम ठेकेदार के नाम से ज्यादा बहुप्रचलित है और,जिनका काम विभाग मे बड़े स्तर के काम को ठेका लेकर ठेकादारी करते हुए स्वयं मूल्यांकन सत्यापन करते है नतीजन काम पूर्ण होने के 6 माह या साल भर मे दरारे सिपेज़ या फिर छड़ उडख़ने की समस्या देखने को मिलता है फिर भी प्रशासन द्वारा ऐसे इंजिनियर को कार्यवाही करने के बजाय उच्च अधिकारी उनसे व्यक्तिगत काम लेते है जिला पंचायत विभाग मे ऐसे इंजिनियर के नाम का हल्ला है किन्तु उनके ऊपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है शायद यही वजह है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम उच्च अधिकारीयों द्वारा किया जाता है तभी ऐसे इंजिनियर के मनोबल को बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग,जो कि गांवों के आधारभूत ढांचे के निर्माण में रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, आज खुद प्रशासनिक ढांचे की अनदेखी का शिकार हो चुकी है। जिस कारण इन दिनों ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। विभाग का एक इंजिनियर स्वीकृत विभिन्न ग्राम पंचायतों के कार्य खुद ही अपनी देखरेख में कार्य करवा रहे हैं और उन कार्यों का मूल्यांकन भी स्वयं कर रहे जिसकी जानकारी उच्च अधिकारियो को होने के बाद कार्यवाही ना होना आपसी तालमेल को दर्शाने के लिए काफ़ी हैं विभाग का प्रशासनिक संतुलन इतना बिगड़ा है, कमिसन के खेल में ब्लॉक के दर्जनों पंचायतों के निर्माण कार्य भी अधर में लटके हुए हैं उनका मूल्यांकन करने का वक़्त उक्त इंजिनियर के पास नहीं हैं। विश्वसनीय सूत्रों प्राप्त जानकारी के अनुसार मनचाहे ग्राम पंचायतों में शासकीय भवन अहाता निर्माण,नाली,पुल-पुलिया,सीसी रोड निर्माण एवं मरम्मत,सामुदायिक भवन,शेड निर्माण जैसे अनेकों महत्वपूर्ण कार्य स्वयं कर रहे हैं। इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति,माप,निरीक्षण और क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा नियंत्रित की जाती है जिनका मूल्यांकन इंजिनियर को ही करना होता हैं ज़ब वें स्वयं अघोषित ठेकेदार बन जाये तों विभाग की कार्यप्रणाली को आसानी से समझा जा सकता हैं ऐसे अनेकों उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहाँ फाइलें महीनों से लंबित हैं, पंचायतें बार-बार जनपद एवं जिला कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन स्वीकृति और निरीक्षण का समय नहीं मिल पा रहा। इसका सीधा असर विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता पर पड़ रहा है। तो न केवल कार्य प्रभावित होता है, बल्कि भ्रष्टाचार, अनियमितता, और प्रशासनिक विफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।
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