देहरादून,09 नवंबर (आरएनएस)। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड की ओर से आयोजित गोष्ठी में आंदोलनकारी कर्मचारी संगठनों के किसी भी पदाधिकारी को सम्मानित नहीं करने पर निराशा व्यक्त की गई। राज्य की 25 वीं रजत जयंती समारोह के उपलक्ष्य में रविवार को उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड ने तहसील स्थित संघ भवन में 25 वर्षों में क्या खाया क्या पाया के संदर्भ में गोष्ठी का आयोजन किया। अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष सोहन सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री अशोक राज उनियाल और मुख्य वक्ता प्रदेश संरक्षक पंचम सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की 25 वीं रजत जयंती वर्ष में किसी भी जनपद में आंदोलनकारी कर्मचारी संगठनों, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी संगठन के किसी भी पदाधिकारी को सम्मानित नहीं किया गया, न ही किसी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। जबकि उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ के बहुत से पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को राज्य आंदोलनकारी का प्रमाण पत्र भी जारी है। 1994 में जब सारे राजनेता थक चुके थे, तो उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने पूरे प्रदेश में आंदोलन को जिंदा रखा। उस आंदोलन में 94 दिन की ऐतिहासिक हड़ताल करके भारत सरकार के गृह मंत्रालय से वार्ता की गई। पंचम सिंह बिष्ट ने कहा कि 25 साल में बहुत कुछ विकास भी हुआ है परंतु हमने खोया भी बहुत कुछ है। उत्तराखंड में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद समाप्त कर दिए गए। राज्य बनने के बाद विभिन्न विभागों का पुनर्गठन हुआ, जिसमें अधिकारियों के पद बढ़ाए गए और नीचे के पदों को समाप्त कर दिया गया। दुर्भाग्य इस बात का है कि उत्तराखंड में राजनेताओं को खूब रोजगार मिला। मौके पर प्रदेश संगठन मंत्री राकेश सिंह रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप कुमार मौर्य, आयुर्वैदिक डिप्लोमा फार्मासिस्ट प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान, आयुर्वेदिक मिनिस्टर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विजय सिंह बिष्ट, जनपद देहरादून अध्यक्ष आशीष जोशी, महामंत्री उर्मिला द्विवेदी, लोक निर्माण विभाग मिनिस्टर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष जम्मू सिंह, राजकीय वाहन चालक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सफर सिंह, सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष राकेश सिंह रावत, रघुवीर सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।

