घटना के खिलाफ भाजपा पर तृणमूल व माकपा ने उठाई उंगलियां
पूर्व बद्र्धमान 9 नवंबर (आरएनएस)। एसआईआर का काम कर रही एक बूथ लेवल अधिकारी बीएलओ की मौत के कारण जहां हंगामा मच गया है। वहीं बीएलओ नमिता हांसदा की मौत पर राजनीति का पारा औप अधिक चढ़ गया है। ऐसे में मृतका के पति व परिजनों का आरोप है कि एसआईआर के दबाव के कारण ही उक्त घटना घटी है। मृतका के परिवार का आरोप है कि काम के दबाव में ब्रेन स्ट्रोक से उनकी मौत हो गई। बूथ पर गणना फॉर्म बांटते समय नमिता हांसदा की तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और वहीं उनकी मौत हो गई। परिवार का दावा है कि फॉर्म बांटने के लिए बीएलओ पर दबाव था। वह डिप्रेशन में थी। परिवार का आरोप है कि इसी वजह से उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ। परिवार को मामले की जांच का आश्वासन दिया गया है। बीएलओ नमिता मेमारी की बोहर-2 पंचायत के चक बलराम गांव की निवासी थीं और स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं। परिवार का दावा है कि शनिवार दोपहर गांव के कोंडा पारा में गणना प्रपत्र बांटते समय नमिता अचानक जमीन पर गिर पड़ीं। उन्हें कालना उपजिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नमिता के पति ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी काफी मानसिक तनाव में थीं। क्योंकि उनके बूथ पर 1200 से ज़्यादा मतदाता थे। फॉर्म जल्दी जमा क्यों नहीं हो रहे थे, चुनाव आयोग बार-बार उन पर फॉर्म जल्दी जमा करने का दबाव बना रहा था। एक पति होने के नाते, उन्होंने अपनी पत्नी को बार-बार समझाया कि इतना दबाव लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें धीरे-धीरे काम करना चाहिए। लेकिन नमिता ने अपने पति को बताया कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन पर दबाव डाल रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। परिवार वालों का मानना है कि यह मानसिक तनाव का नतीजा था। अस्पताल का भी मानना है कि उनकी मौत ब्रेन स्ट्रोक के कारण हुई। तमाम कोशिशों के बावजूद, नमिता को आखिरकार बचाया नहीं जा सका। उस रात उन्हें कहीं और ले जाने का कोई रास्ता नहीं था। आखिरकार नमिता की मौत हो गई। नमिता की मौत पर बीएलओ एकता मंच के महासचिव स्वपन मंडल ने कहा, यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अप्रत्याशित है। एक तरफ चुनाव आयोग का दबाव है, वहीं राज्य की सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल का भी दबाव है। सारा दबाव बीएलओ पर पड़ रहा है। काम तो करना ही है। लेकिन इस तरह लक्ष्य तय करना ठीक नहीं है। इसलिए हमने आयोग से समय बढ़ाने का अनुरोध किया है। मैंने कहा, 11 तारीख तक यह संभव नहीं है। कई बूथों पर दो-तीन दिन की देरी हो रही है! इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि असामान्य दबाव है। आयोग को हमारी मांग माननी चाहिए। केवल वे ही दिन बदल सकते हैं। सरकारी कर्मचारी जो काम कर रहे हैं, वे भी इंसान हैं। उन पर यह थोपा नहीं जा सकता। फॉर्म बांटने में ज़्यादा समय लगता है। लेकिन उसके लिए कम समय दिया गया है। यह वैज्ञानिक नहीं है, उचित नहीं है और मानवीय भी नहीं है।
तृणमूल के अरूप चक्रवर्ती ने इस घटना पर खुलकर बात की है। उनका बयान, इसे बेहद दुखद कहना कम होगा। इस मौत के लिए शुभेंदु अधिकारी जिम्मेदार हैं। पहले दिन से ही वे बीएलओ को धमका रहे थे। धमकी दे रहे थे कि ‘मैं बीएलओ की नौकरियां छीन लूंगा। सीपीएम केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। दुख व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। एसआईआर प्रक्रिया में इस तरह की दहशत पैदा की गई है, जिस तरह से आयोग ने इसे स्थापित किया है, दहशत है, जमीनी स्तर से दबाव है, उसके ऊपर से भाजपा हर दिन बीएलओ को धमकी दे रही है।
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