भोपाल 9 नवंबर (आरएनएस)। घुटने के दर्द से परेशान मरीजों के लिए राहत की नई किरण लेकर आई है यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट तकनीक। इस अत्याधुनिक सर्जरी से अब सिर्फ घुटने के प्रभावित हिस्से को ही रिप्लेस किया जाता है, जिससे मरीजों को कम दर्द, तेज रिकवरी और पहले जैसी स्वाभाविक मूवमेंट मिल रही है।
इसी तकनीक की जानकारी और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से शनिवार को जीएमसी भोपाल द्वारा भोपाल ऑर्थोपेडिक सर्जन्स सोसाइटी के सहयोग से तथा एमपी आथ्र्रोप्लास्टी सोसाइटी और एमपीआईओए के तत्वावधान में ्यक्र डे स्कूल एवं लाइव सर्जरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर इंदौर के प्रसिद्ध जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। वर्कशॉप में ्यक्र सर्जरी की बारीकियों, सर्जिकल प्रिसिशन और बेहतर क्लिनिकल परिणामों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत विशेषज्ञों के लेक्चर और पैनल डिस्कशन से हुई, जिसमें प्रदेशभर के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन शामिल हुए। इसके बाद लाइव सर्जरी सेशन में डॉक्टरों ने वास्तविक ऑपरेशन प्रक्रिया को देखा और ्यक्र सर्जरी के हर चरण को करीब से समझा। साथ ही, हैंड्स-ऑन सॉ बोन वर्कशॉप में सर्जनों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई।
डॉ. हेमंत मंडोवरा ने बताया, ्यक्र तकनीक घुटने के केवल प्रभावित हिस्से को बदलती है। यह सर्जरी न सिर्फ सटीक और सुरक्षित है, बल्कि इससे मरीज को कम दर्द होता है और वह बहुत जल्दी अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है।
गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने कहा कि इस वर्कशॉप का उद्देश्य अधिक से अधिक सर्जनों को इस उन्नत तकनीक से परिचित कराना है ताकि वे इसे अपनी प्रैक्टिस में लागू कर सकें। उन्होंने बताया, ्यक्र उन मरीजों के लिए वरदान है, जो शुरुआती या एक हिस्से के आर्थराइटिस से पीडि़त हैं।
इस तकनीक से पूरा घुटना नहीं, बल्कि केवल प्रभावित भाग रिप्लेस किया जाता है, जिससे रिकवरी बहुत तेज़ होती है। इस अवसर पर डॉ. शीतल गुप्ता और डॉ. अनुराग तिवारी ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम डॉक्टरों के बीच ज्ञान-विनिमय और नई तकनीकों के प्रसार में अहम भूमिका निभाते हैं।


















