तिरुपति ,10 नवंबर(आरएनएस)। देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरुपति मंदिरों में हर साल पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े प्रसाद (लड्डू) को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बीते साल इन लड्डुओं में जानवरों की चर्बी मिला घी इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अब इस केस की जांच में 50 लाख रुपये के बड़े लेनदेन (रिश्वत) की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को घी सप्लाई करने के मामले में यह गड़बड़ी हुई है। यह रकम तिरुपति मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी के सहायक के. चिन्नाप्पन्ना को दी गई थी।
50 लाख की घूस, दिल्ली में हुई डिलीवरी
जांच के अनुसार, वाईवी सुब्बा रेड्डी (जो तब लोकसभा सांसद थे और अब राज्यसभा में हैं) के निजी सहायक के. चिन्नप्पन्ना को 50 लाख रुपये कैश मिले थे। यह पूंजी हवाला एजेंट्स के जरिए दी गई थी, जिसे यूपी स्थित कंपनी ‘एग्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेडÓ ने भेजा था।
जांच में यहां तक पता चल गया है कि दिल्ली स्थित एक एजेंट अमन गुप्ता ने उन्हें 20 लाख रुपये दिए थे। इसके बाद, कंपनी के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव विजय गुप्ता ने बाकी की रकम दी। दोनों बार रकम का लेनदेन दिल्ली के पटेल नगर मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच में खुले राज
बीते साल इस मामले पर खूब विवाद मचा था और प्रसाद की पवित्रता से समझौता करने के आरोप लगे थे। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो बेंच ने सीबीआई, राज्य पुलिस और फूड सेफ्टी अधिकारियों (स्नस्स््रढ्ढ) को मिलाकर एक जांच कमेटी बनाने का आदेश दिया था।
इस टीम की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में कहा गया है कि लड्डुओं के लिए घी सप्लाई करने में 4 कंपनियां शामिल थीं। इन कंपनियों ने टेंडर हासिल करने के लिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ की और कीमतों में भी फेरबदल किए। ‘भोले बाबा ऑर्गनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेडÓ ने रुड़की स्थित अपने प्लांट में यह घी तैयार किया था। इसमें पाम ऑयल और केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया था। इस मिलावटी घी को तीन अन्य कंपनियों (श्री वैष्णवी डेयरी, मालगंगा मिल्क ऐंड एग्रो प्रोडक्ट्स, और एआर डेयरी फूड्स) के जरिए सप्लाई किया गया। कुल मिलाकर 60.37 लाख किलो घी 240.8 करोड़ रुपये में बेचा गया।
मिलावट की पुष्टि के बाद भी जारी रही सप्लाई
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह भी पता चला है कि मैसुरु स्थित ‘सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूटÓ (ष्टस्नञ्जक्रढ्ढ) ने इस घी में मिलावट की बात कही थी। इसके बावजूद, यह सप्लाई 2024 तक जारी रही, जो पूरे मामले में अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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