कुल्लू ,10 नवंबर(आरएनएस)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले स्थित बंजार उपमंडल की तीर्थन घाटी में मंगलवार (या घटना वाले दिन का उल्लेख) दोपहर बाद एक भीषण अग्निकांड हो गया। तीर्थन घाटी के दुर्गम झनियार गांव में भड़की इस आग ने देखते ही देखते पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। इस विनाशकारी घटना में करीब 10 से 12 रिहायशी मकान, दो मंदिर, 6 गोशालाएं और घास रखने की कई खलियां (स्टोर) जलकर पूरी तरह राख हो गईं।
सड़क न होने से नहीं पहुंच सकी फायर ब्रिगेड
आग लगने की सूचना मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों और आसपास के गांवों के लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग पर काबू पाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि उसे बुझाया नहीं जा सका।
गांव का सड़क मार्ग से कई किलोमीटर दूर होना बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन गया। दुर्गम रास्ता होने के कारण अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) की गाडिय़ां भी मौके तक नहीं पहुंच पाईं, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ गया।
सर्द मौसम में बेघर हुए ग्रामीण, टेंटों में रहने को मजबूर
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब इलाके में शीत ऋतु की शुरुआत हो रही है। इस आपदा ने दर्जनों ग्रामीणों को कड़ाके की ठंड में बेघर कर दिया है। प्रभावित परिवार अब अस्थायी टेंटों में रहकर अपनी जिंदगी की मुश्किलें झेल रहे हैं।
प्रशासन ने प्रभावितों के लिए तात्कालिक राहत देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों से भी राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील की गई है।
गौरतलब है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर सर्दियों में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार ठंड से बचने के लिए सेंकने के लिए रखी आग ही पूरे आशियाने के राख होने का कारण बन जाती है।
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