ऋषिकेश,11 नवंबर (आरएनएस)। श्रीदेव सुमन विवि परिसर ऋषिकेश में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं परम्परा विषय व्याख्यानमाला दूसरे दिन भी जारी रही। जिसमें वक्ताओं ने छात्र छात्राओं को भारतीय ज्ञान प्रणाली में अध्यात्म और विज्ञान को परस्पर पूरक बताया। मंगलवार को भारतीय ज्ञान परम्परा उत्कृष्टता केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यानमाला के दूसरे दिन के मुख्य वक्ता बाबा काली कमली संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश पाण्डे रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है, जो वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, गणित, खगोल, दर्शन, संगीत, वास्तु, योग एवं व्याकरण जैसे विविध ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्रों को एकसूत्र में पिरोती है। कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में पतंजलि के योगसूत्र और पाणिनि के अष्टाध्यायी जैसे ग्रन्थ इस प्रणाली की बौद्धिक गहराई और तार्किक सुदृढ़ता के प्रतीक हैं। पाणिनि का व्याकरण न केवल भाषिक विज्ञान का सर्वोच्च उदाहरण है, बल्कि यह आज के कंप्यूटर भाषाविज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सिद्धांतों से भी साम्य रखता है। पतंजलि का योगदर्शन भारतीय चिंतन की वह धारा है, जो आत्मसंयम, साधना और मनोविज्ञान के वैज्ञानिक स्वरूप को प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि ये ग्रन्थ यह प्रमाणित करते हैं कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में अध्यात्म और विज्ञान परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। मौके पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. गौरव वार्ष्णेय, भारतीय ज्ञान परम्परा उत्कृष्टता केन्द्र की उपनिदेशक प्रो. पूनम पाठक, शिखा वार्ष्णेय, मोनिका काला, कविता, संजय तिवारी, राहुल सुयाल आदि उपस्थित रहे।
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