उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में प्रशासनिक दक्षता, नैतिकता और आपदा प्रबंधन पर हो रहा व्यापक प्रशिक्षण
लखनऊ, 13 नवंबर (आरएनएस )उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व और मार्गदर्शन में दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में विभिन्न सरकारी और अर्धसरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा रचनात्मक कार्यों से जुड़े व्यक्तियों को प्रशिक्षित कर उन्हें अधिक दक्ष, सक्षम और उत्तरदायी बनाने का कार्य निरंतर जारी है। संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू और प्रधान अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के प्रशासनिक नियंत्रण में संस्थान प्रांगण में कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।संस्थान द्वारा 10 से 15 नवम्बर तक विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें केन्द्रीय सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से 279 नवचयनित अधिकारियों को विलेज अटैचमेंट विषयक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम के प्रथम चरण में 74 अधिकारियों को लखनऊ जनपद की तहसीलों, विकास खंडों, कोतवालियों और ग्राम पंचायतों में संचालित शासकीय संस्थाओं जैसे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, गौशालाओं और अमृत सरोवरों का व्यवहारिक अध्ययन कराया जा रहा है।इसी अवधि में संस्थान द्वारा 10 से 12 नवम्बर तक लर्निंग बाय डूइंग विषय पर 100 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त, 10 से 14 नवम्बर तक जलवायु परिवर्तन और जलवायु जनित आपदाओं के अनुकूलन पर क्षमता संवर्धन विषयक प्रशिक्षण का आयोजन जनपद स्तरीय 30 अधिकारियों के लिए किया जा रहा है। ये सभी कार्यक्रम महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू के संरक्षण और अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के नियंत्रण में संचालित हो रहे हैं।संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष सत्र में मिशन कर्मयोगी तथा शासकीय सेवाओं में नैतिक और मानवीय गुणों के परिप्रेक्ष्य पर चर्चा हुई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद और पूर्व वरिष्ठ सदस्य, लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश के डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ रंजीत रंजन और यूनिसेफ लखनऊ के कार्यक्रम अधिकारी (आपदा) उपस्थित रहे।डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर आदर्श कार्यों और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए नागरिकों को अपने व्यवहार में आज्ञाकारिता, धैर्य और नवाचार की भावना को आत्मसात करना होगा। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे ऐसा कोई कार्य न करें जिससे किसी की आत्मा आहत हो।कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों और उनके समाधान के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।अध्यक्षीय उद्बोधन में महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठा, परिश्रम और ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पद जनहित की दृष्टि से छोटा या बड़ा नहीं होता। कई बार छोटे पदों पर कार्यरत कर्मचारी अपने कर्तव्यनिष्ठ कार्यों से समाज में अधिक प्रतिष्ठा अर्जित करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे अपने कार्यों के माध्यम से ग्रामीण समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँ और भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प में सहभागी बनें।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन कुमार सिन्हा ने किया। आयोजन एवं प्रबंधन में उप निदेशक डॉ. नीरजा गुप्ता, सहायक निदेशक सरिता गुप्ता, डॉ. राज किशोर यादव, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, संजय कुमार, राजीव कुमार दूबे, डॉ. सीमा राठौर, डॉ. वरुण चतुर्वेदी, धर्मेंद्र कुमार सुमन, मोहित यादव और डॉ. शिव बचन सिंह यादव का सक्रिय योगदान रहा। वहीं, संस्थान के उपेंद्र कुमार दूबे, मोहम्मद शहंशाह, मोहम्मद शाहरुख और अन्य कार्मिकों ने सहयोगी भूमिका निभाई।
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