अस्पताल को सीज कर संचालक पर दर्ज किया मुकदमा
रामनगर, बाराबंकी 13 नवंबर (आरएनएस)। रामनगर थाना क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे कटियारा में चल रहे ग्रीन हॉस्पिटल में बुधवार को हुई प्रसूता की मौत को लेकर परिजनों ने काफी हंगामा किया। मृतक प्रसूता लक्ष्मी के शव को पीएम के लिए भेजा गया। मृतक का शव रजनापुर मजरे गोबरहा वापस आने के बाद परिजन ग्रीन अस्पताल के संचालक व डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज किए जाने व अस्पताल को सील किए जाने की मांग कर हंगामा किया, जिस पर ग्राम रजनापुर में भारी पुलिस बल तैनात की गई। नजाकत को भांपते हुए रामनगर तहसीलदार विपुल कुमार सिंह ने पहुंचकर परिजनों को समझाने का प्रयास किया। ब्लॉक प्रमुख संजय तिवारी, रामनगर प्रभारी निरीक्षक अनिल पांडे ने भी परिजनों को कार्रवाई किए जाने का आष्वासन दिया किंतु परिजन नहीं माने। प्रशासन द्वारा ग्रीन अस्पताल को सीज करने व संचालक तथा डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज करने के बाद मृतक प्रसूता लक्ष्मी का दाह संस्कार किया गया। बताते चले कि कटियारा स्थित ग्रीन हॉस्पिटल का ऐसे विवादों से पुराना नाता रहा है पूर्व में भी ऐसे कई मामले हो चुके है किंतु ग्रीन अस्पताल के संचालक की विभागीय साठ गांठ और ऊंची पकड़ के कारण मामले को रफा दफा कर दिया गया था।
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स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहे सवाल
रामनगर समेत पूरे जनपद में धड़ल्ले से मानक विहीन गैर मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों व झोला छाप डॉक्टर्स की भरमार है। जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अवधेश यादव समेत उपमुख्य चिकित्साधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी अस्पतालों, मानक विहीन पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक सेंटर्स झोला छाप डॉक्टर्स की जांच पड़ताल के नाम पर केवल औपचारिकता निभा कर मोटी रकम वसूली जाती है जिसमें क्षेत्रीय सीएचसी अधीक्षक भी इस कार्य में संलिप्त रहते हैं। जिले का स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों, निजी पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक सेंटरों, झोलाछाप डॉक्टर्स के माध्यम से मौतो का सौदा करने में संलिप्त है। अभी हाल ही में सूरतगंज कस्बे में भी चल रहे एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत हुई थी उसमें भी कार्यवाही सिर्फ जांच पड़ताल तक ही सीमित रही। निजी गैर मान्यता प्राप्त मानक विहीन अस्पतालों पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटर्स व झोलाछाप डॉक्टर्स पर जिले के स्वास्थ्य विभाग समेत जिम्मेदार अधिकारियों की मेहरबानी क्यों?
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