दुर्ग, 22 मार्च (आरएनएस)। अब ड्रग्स तस्करों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। दुर्ग पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के मामलों में ढिलाई और तकनीकी खामियों पर सीधा वार करते हुए 65 विवेचकों को ऐसा प्रशिक्षण दिया है, जो जांच की पूरी तस्वीर बदल सकता है—जप्ती से लेकर कोर्ट में साक्ष्य तक हर कदम अब ज्यादा मजबूत और कानूनन पुख्ता होगा। दुर्ग पुलिस ने नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच को धार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 22 मार्च 2026 को पुरानी पुलिस लाइन स्थित दधीचि प्रशिक्षण हाल में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एएसआई से लेकर निरीक्षक स्तर तक कुल 65 विवेचकों ने हिस्सा लिया।
उद्देश्य साफ था—एनडीपीएस एक्ट के मामलों में कोई भी तकनीकी चूक अब आरोपियों को फायदा न दे सके। प्रशिक्षण के दौरान जांच की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया। मौके पर कार्रवाई से लेकर सैंपलिंग, जप्ती, एफएसएल जांच और कोर्ट में चालान पेश करने तक हर स्टेप को विस्तार से बताया गया। खास तौर पर ‘चेन ऑफ कस्टडीÓ पर फोकस रखा गया, ताकि सबूतों की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर विवेचक को कानून के हर प्रावधान का सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत जांच ही सफल अभियोजन की कुंजी है और इसके लिए प्रशिक्षण को नियमित बनाया जाएगा। प्रशिक्षण में एजीपी प्रकाश शर्मा ने केस स्टडी के जरिए बताया कि छोटी-छोटी लापरवाहियां कैसे बड़े केस को कमजोर कर देती हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कसार और के.के. द्विवेदी ने कोर्ट के नजरिए से साक्ष्य संकलन और दस्तावेजीकरण की बारीकियां समझाईं, ताकि केस ट्रायल के दौरान टिक सके। एफएसएल भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पंकज ताम्रकार ने मौके पर सैंपलिंग, दस्तावेज तैयार करने और ओवरराइटिंग से बचने जैसे तकनीकी पहलुओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया। उन्होंने साफ कहा कि वैज्ञानिक जांच में छोटी गलती भी पूरे केस को प्रभावित कर सकती है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चन्द्रा ने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं—50, 55, 57 और 29—के तहत कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया समझाई और बताया कि सह-अभियुक्तों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है जितना मुख्य आरोपी को पकडऩा। इस पूरे प्रशिक्षण का सीधा संदेश साफ है—अब दुर्ग पुलिस ड्रग्स मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी। हर केस में तकनीकी मजबूती, सटीक साक्ष्य और कानूनी कसावट के साथ कार्रवाई होगी। यानी आने वाले समय में नशे के कारोबारियों के लिए कानून से बच पाना और मुश्किल होने वाला है।
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