दुर्ग, 17 मई (आरएनएस)। भिलाई में लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते और पासबुक इक_ा करने वाला एक खतरनाक म्यूल अकाउंट नेटवर्क आखिरकार दुर्ग पुलिस के शिकंजे में आ गया। थाना छावनी पुलिस ने साइबर फ्रॉड और क्रिकेट सट्टे में इस्तेमाल हो रहे बैंक खातों के बड़े खेल का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी भोले-भाले लोगों को लोन दिलाने का लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और एटीएम हासिल करते थे, फिर मोटी रकम लेकर इन्हें साइबर ठगों और सट्टा नेटवर्क तक पहुंचाते थे। मामला तब खुला जब थाना छावनी पुलिस को सूचना मिली कि बैकुण्ठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 25 परिसर में अवैध तरीके से बैंक खातों का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। 16 मई 2026 को पुलिस को मुखबिर से पुख्ता जानकारी मिली कि जावेद अख्तर नाम का युवक आकाश जायसवाल के माध्यम से बैंक खाते और पासबुक इक_ा कर उन्हें साइबर फ्रॉड और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल रेड कार्रवाई की और दोनों आरोपियों को मौके से दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर बैंक खाते और पासबुक लेते थे और बाद में इन्हें मोटी रकम लेकर अन्य लोगों को सौंप देते थे। गिरफ्तार आरोपियों में आकाश जायसवाल निवासी शारदा पारा कैम्प-02 भिलाई और जावेद अख्तर निवासी मदर टेरेसा नगर कैम्प-01 भिलाई शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से महाराजा बैंक से जुड़े खाता दस्तावेज और वीवो कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया है। थाना छावनी में आरोपियों के खिलाफ धारा 319 और 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर उन्हें विधिवत गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि म्यूल अकाउंट नेटवर्क साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं, जिनके जरिए ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल बना दिया जाता है। दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज किसी भी व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें, क्योंकि ऐसा करना उन्हें भी अपराध के दायरे में ला सकता है। फिलहाल, इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब साइबर अपराध सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंक खातों की खरीद-फरोख्त के जरिए पूरा संगठित नेटवर्क शहरों में सक्रिय हो चुका है।
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