कोलकाता 14 नवंबर (आरएनएस)। सोनारपुर में हुए हमले के मामले में शुल्क विभाग के एक अधिकारी को बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आज उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट टिप्पणी की कि पुलिस ने बिना प्राथमिक जांच किए एफआईआर दर्ज कर ली थी, जो कानूनन उचित नहीं है। घटना की शुरुआत एक गाड़ी से हुई दुर्घटना को केंद्र कर थी। सोनारपुर के शुल्क अधिकारी और कुछ ऑटो चालकों के बीच इसको लेकर बहस हुआ। हालांकि थोड़ी देर बाद विवाद शांत हो गया और अधिकारी अपने घर लौट गए। लेकिन आरोप है कि कुछ समय बाद करीब 50–60 लोग उनके आवास के बाहर जमा हो गए। भीड़ ने दरवाजा तोड़कर अंदर घुसकर कथित रूप से तांडव मचाया। शुल्क अधिकारी को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनके माथे में गंभीर चोट आई। आरोप यह भी है कि उनकी पत्नी के साथ दुव्र्यवहार किया गया। बाद में घायल अधिकारी को गंभीर अवस्था में कल्याणी एम्स में भर्ती कराया गया। आज मामले की पुन: सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने कहा कि पुलिस द्वारा बिना प्रारंभिक जांच किए एफआईआर दर्ज करना प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है। इसके बाद अदालत ने शुल्क अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने का आदेश सुना दिया।
इस फैसले के बाद शुल्क अधिकारी और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है, जबकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस को भविष्य में ऐसे मामलों में उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

