हरिशंकर व्यास
हां, 15 अगस्त 1947 से अब तक का भारत रिकॉर्ड खंगाल डालिए। वैश्विक मंच में भारत को इतना जलील, हिंदुओं को इतनी गालियां पहले कभी नहीं मिलीं, जितना मई 2025 से शुरू सिलसिला है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों ने मानों ठान ली हो। इस सप्ताह गजब ही हुआ। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के कॉरपोरेट जमावड़े में प्रधानमंत्री मोदी की नकल की। कहा, मोदी बहुत खूबसूरत इंसान हैं, पर किलर हैं, बहुत टफ हैं। फिर आवाज़ बदलकर मोदी लहजे में बोले नो, नो, वी मस्ट फाइट! और सभागार हंसी से गूंज उठा। सोचें, भारत अब ‘किलरÓ के देश के रूप में हंसी का विषय।
इसी भाषण में ट्रंप ने फिर कहा, मैंने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया और कहा— हम आपके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री मोदी बोले— नहीं, नहीं, हमें व्यापार समझौता करना ही चाहिए। मैंने कहा— नहीं, नहीं कर सकते। आप पाकिस्तान से युद्ध शुरू कर रहे हैं, हम ऐसा नहीं करेंगे।ज् मैंने चेतावनी दी थी कि अगर तुम लोग नहीं रुके तो मैं दोनों देशों पर 250 प्रतिशत शुल्क लगा दूंगा— जिसका मतलब होगा कि तुम कभी व्यापार नहीं कर पाओगे।ज् मैंने पढ़ा कि सात विमान गिराए गए हैं। ये दोनों परमाणु संपन्न देश हैं और एक-दूसरे से भिड़े हुए हैं।
मानों यह कम हो जो ट्रंप ने फिर कहां कि, मैं भारत के साथ एक व्यापार समझौता कर रहा हूं, और मुझे प्रधानमंत्री मोदी के प्रति बहुत सम्मान और प्रेम है।ज्.उसी तरह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी बहुत अच्छे इंसान हैं। उनके पास एक फील्ड मार्शल हैं— जानते हैं वह फील्ड मार्शल क्यों हैं? (ध्यान रहे यह तमंगा उन्हे ऑपरेशन सिंदूर के बाद मिला था) क्योंकि वह एक महान योद्धा हैं, बहुत बढिय़ा व्यक्ति हैंज् मैं इन सबको अच्छी तरह जानता हूं।
सोचे, ये वे ट्रंप हैं, जिनकी चमचागिरी में प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव के दौरान प्रवासी हिंदुओं के बीच कहा था कि अबकी बारज्. ट्रंप सरकार! इतिहास का सत्य है कि पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी की विदेश नीति से अमेरिका हमेशा खटका रहा। लेकिन मजाल जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और उसके प्रधानमंत्री का ऐसे अपमान किया हो। मजाक उड़ाया हो। मगर ट्रंप के लिए मोदी सरकार ऐसी हो गई है जो सौ प्याज, सौ जूते खाते हुए भी अंतत: अमेरिका की शर्त में सौदा करेगी। तभी उन्होने दक्षिण कोरिया में विश्वास जताया कि मैं भारत के साथ एक व्यापार समझौता कर रहा हूं!
ठिक दूसरी तरफ इस सप्ताह चीन ने ट्रंप को झुकाया। अमेरिका को ‘रेयर अर्थÓ निर्यात की सहमति दे कर, सोयाबीन की खरीद वापिस शुरू करके अमेरिकी टैरिफ घटाने का ट्रंप से बयान दिलवाया। वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से सामना होने से बचने के लिए मलेशिया में आयोजित आसियान सम्मेलन से कन्नी काटी। जबकि ब्राज़ील और कनाडा जैसे देशों ने भी सप्ताह भर चली आसियान बैठक में हिस्सा लिया थी लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ग़ैरहाजिऱ थे।
और इससे भी बुरी हकीकत दुनिया में हिंदुओं से नफरत में तेजी है। पाकिस्तानियों के हौसले बढ़े हुए हैं। अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन कोई पहले की तरह अब भारत या हिंदुओं का पैरोकार नहीं। दिवाली पर ट्रंप के संदेश का भारत में चाहे जितना ढोल बजा मगर असलियत है कि उस त्योहार के दिन अमेरिका के सोशल मीडिया में हिंदुओं को गालियां थीं। ट्रंप के खास और अमेरिका की घरेलू सीबीआई याकि एफबीआई के प्रमुख प्रवासी भारतीय काश पटेल ने इतना भर दिवाली का यह संदेश दिया था- हेप्पी दिवाली टू ऑल! और बस फिर सोशल मीडिया पर ट्रंप भक्त कट्टरपंथियों का झुंड टूट पड़ा। किसी ने लिखा— विदेशी देवताओं का त्योहार अमेरिका में मत मनाओ, किसी ने कहा— सभी हिंदुओं को देश से निकालो और किसी ने सीधे-सीधे दिवाली को ‘राक्षसों का उत्सवÓ बताया।
हिंदुओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा प्रलाप हुआ। इसकी लंबी चौडी रपट ऑपइंडिया वेबसाइट पर छपी हुई (साभार नया इंडिया में भी प्रकाशित) है। खुद को कट्टर कैथोलिक बताने वाली एक महिला ने हिंदुओं को झूठे देवताओं के उपासक कहा और दिवाली को दुष्ट देवताओं का त्योहार बताया। उसने लिखा– मेरा उद्देश्य उन सभी लोगों को सत्ता से हटाना है जो झूठे देवताओं और पगान राक्षसों की पूजा करते हैं। दिवाली में झूठे देवताओं की पूजा होती है और ये रोशनी उन राक्षसी देवताओं को बुलाने के लिए जलाई जाती हैं। एक यूजर ने लिखा– भारतीय अमेरिका और कनाडा आकर वन्य जीवों का शिकार करते हैं। भारत में अब सिर्फ चूहे और कॉकरोच ही बचे हैं। अगर वे यहा लंबे समय तक रहेंगे, तो यही उत्तर अमेरिका में भी करेंगे।
और इन सब बातों का, अचानक फूटे इस हिंदू विरोध का मोदी सरकार के पास प्रतिवाद नहीं है। वह मौन है। तभी हर प्रवासी हिंदू, विदेश में पढ़ रहे छात्र मोदी सरकार को मन ही मन कोसते हुए हैं। जिन प्रवासी भक्तों ने मोदी के स्वागत में कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया में ढोल बजाए थे वे सभी अनुभवों पर सोचते हुए हैरान-परेशान होंगे कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनके ये कैसे ‘अच्छे दिनÓ बनवाए?
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