विकासनगर,16 नवंबर (आरएनएस)। सीबीएसई सहयोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स की हाईलैंड स्कॉलर्स स्कूल बाबूगढ़ में संपन्न हुई बैठक में शिक्षा की मौजूदा चुनौतियों पर मंथन किया गया। शिक्षकों और विभिन्न विद्यालयों के संस्थाध्यक्षों ने कहा कि भविष्य की शिक्षा को किताबों और परीक्षाओं से आगे बढ़कर नवीनता, तकनीक और मानवीय मूल्यों से जोडऩा होगा। इस रोडमैप में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सहोदय के अध्यक्ष सोमदत्त त्यागी ने कहा कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म ने शिक्षा को घर-घर पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है। शिक्षकों को इन प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के लिए व्यापक और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना आवश्यक है, ताकि वे ऑनलाइन कंटेंट को प्रभावी ढंग से कक्षा में लागू कर सकें। कहा कि अभी भी शिक्षा प्रणाली में छात्रों को रचनात्मक सोच से अधिक रटने पर ज़ोर दिया जाता है। इससे विद्यार्थी सिर्फ परीक्षा पास करते हैं, लेकिन विषय की गहराई नहीं समझ पाते। इसके लिए कक्षा कक्षों को आधुनिक बनाना जरूरी है। छात्रों को उनके रुचि और कौशल के अनुसार कॅरियर की जानकारी नहीं मिलती। ज्यादातर विद्यार्थी समाज या माता-पिता के दबाव में निर्णय लेते हैं। विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप उन्हें कॅरियर तलाशने के लिए तैयार करने के साथ ही उनके अभिभावकों को भी जागरूक किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में कई संभावनाएं हैं, लेकिन इन चुनौतियों को दूर करना जरूरी है। यदि सरकार, समाज और शिक्षक मिलकर ईमानदारी से प्रयास करें, तो भारत शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन सकता है। इसके लिए नई शिक्षा नीति को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रेक्टिकल और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। इस दौरान बीएस राणा, पवन डोगरा, अनिल बोहरा, ओपी चुग आदि मौजूद रहे।
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