दुर्ग, 18 नवंबर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के लगभग 70 हजार बुनकर इन दिनों गंभीर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। बुनकर संगठनों का आरोप है कि सरकारी नियम स्पष्ट होने के बावजूद कई विभाग स्थानीय बुनकरों से कपड़ा खरीदने के बजाय बाहरी राज्यों से पावरलूम उत्पाद मंगा रहे हैं। इससे प्रदेश की पारंपरिक हैंडलूम उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है और हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी खतरे में पड़ गई है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और बुनकर सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित कपड़ा खरीदी को प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश होने के बावजूद अधिकांश बड़े विभाग आदेश जारी नहीं कर रहे। स्कूल शिक्षा विभाग को हर साल लगभग 55 से 60 लाख स्कूल यूनिफॉर्म सेटों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए करीब 150 से 160 लाख मीटर कपड़ा चाहिए होता है। इतनी बड़ी मांग होने के बावजूद बुनकरों को पर्याप्त ऑर्डर नहीं मिल रहे, जिसके चलते उत्पादन स्तर गिरने लगा है और बुनकरों की आय लगातार कम हो रही है।
दुर्ग में आयोजित बुनकर सम्मेलन में संघ ने सरकार से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि बाहरी राज्यों से कपड़ा खरीदी तुरंत बंद की जाए और केवल छत्तीसगढ़ में निर्मित फैब्रिक को ही प्राथमिकता दी जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं निकला तो वे प्रदेशभर में आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। बुनकरों का कहना है कि यह केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि उनकी विरासत, परंपरा और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य की लड़ाई है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है।
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