हरिद्वार,18 नवंबर (आरएनएस)। शांतिकुंज स्थित गायत्री विद्यापीठ में आयोजित दो दिवसीय उत्सव-25 के समापन पर मुख्य अतिथि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि विद्यापीठ के बच्चों की प्रस्तुतियां केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और मूल्यबोध विकसित होता है। गायत्री विद्यापीठ की प्रबंधिका शैफाली पंड्या ने बच्चों को नवांकुर प्रतिभाएं बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने नौनिहालों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम का शुभारम्भ रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजे बच्चों द्वारा प्रस्तुत गढ़वाली लोक नृत्य से हुआ। इसके बाद मंचित कृष्ण-सुदामा मिलन ने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। कालिया नाग वध, गोवर्धन लीला, रासलीला तथा कंस वध प्रस्तुतियों में बाल कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय और संवाद-अभिनय से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का सबसे प्रभावी और सामाजिक संदेश देने वाला दृश्य रहा द्रौपदी चीर-हरण नाट्य मंचन। बच्चों ने इस प्रसंग को बेहद संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ प्रस्तुत करते हुए दर्शकों के सामने नारी शक्ति, सम्मान और सुरक्षा का सार्थक संदेश रखा। इसके अतिरिक्त मीरा बाई, महाभारत युद्ध तथा स्वयं भगवान हमारे गुरु जैसी आकर्षक झांकियों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। अनेक दर्शकों ने इन झांकियों को विद्यालय के सांस्कृतिक-शिक्षात्मक वातावरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। संचालन स्तुति पंड्या, रिया सैनी, कृष्णा और अक्षित सैनी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रधानाचार्य सीताराम सिन्हा ने बताया कि उत्सव-25 में प्ले से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। खेल प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय आने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
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