देहरादून,18 नवंबर (आरएनएस)। यूपीईएस के फ्यूचर फाउंडर्स चैलेज में मंगलवार को देशभर के स्कूली छात्रों ने अपने अनोखे नवाचारों से प्रतिभा दिखाई। इस स्टार्ट-अप प्रतियोगिता में 30 शीर्ष स्कूलों के 1200 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। 500 से अधिक प्रविष्टियों में से 90 से ज्यादा छात्र फाइनल राउंड तक पहुंचे और अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया। कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य उन्हें वास्तविक उद्यमिता का अनुभव देना था। प्रतिभागियों ने विचार विकसित किए, बिजनेस माडल तैयार किए और पेशेवर पिचिंग में अपने कौशल का प्रदर्शन किया। दो दिनों तक चले कार्यक्रम में कीनोट सत्र, इंटरैक्टिव वर्कशाप और पिचिंग राउंड शामिल थे, जिनमें नवाचार, स्पष्टता और समस्या-समाधान कौशल का परीक्षण किया गया। फाइनल राउंड में शीर्ष 10 टीमों ने अपनी प्रस्तुति दी। सागर पब्लिक स्कूल, भोपाल की टीम ने ‘रक्षक’ स्मार्ट क्रच, दिल्ली के एपीएस धौला कुआं की टीम ने साइन लैंग्वेज को टेक्स्ट में बदलने वाली रोबोटिक ग्लव ‘वाणी’ , डीपीएस जबलपुर की टीम ने एआइ सक्षम स्मार्ट ग्लासेस ‘फ्य़ूचर फारवर्ड्स’ और वेंदकेश्वर इंटरनेशनल स्कूल, द्वारका की टीम ने सतत बायोफ्यूल जनरेशन सिस्टम की प्रस्तुति दी। निर्णायक मंडल में नियोमोशन के संस्थापक सिद्धार्थ डागा , फन टू लैब्स के संस्थापक सौरभ जैन, हेल्थकेयर एंड लाइफ साइसेंज विशेषज्ञ डा. विक्रम वेंकटेश्वरन और मैटी स्टार्टअप हब के पूर्व सीईओ जीत विजय शामिल थे। उन्होंने प्रतिभागियों के नवाचार, प्रस्तुति और सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन किया।कार्यक्रम के समापन पर विजेता टीमों को नगद पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेता टीम को एक लाख , प्रथम उप विजेता को 50 हजार और द्वितीय उप विजेता को 25 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई। अन्य टीमों को 15 हजार, दस हजार व साढ़े सात हजार रुपये की राशि दी गई। चयनित टीमों को यूपीईएस रनवे इनक्यूबेटर के माध्यम से मार्गदर्शन और संभावित इनक्यूबेशन अवसर भी प्रदान किए जाएंगे। कुलपति डा. राम शर्मा ने कहा कि उद्यमिता केवल यूनिकार्न के पीछे भागने का नाम नहीं है। यह वास्तविक समस्याओं की पहचान करने और उनका प्रभावी समाधान करने की कला है। छात्रों को सामान्य से परे सोचकर ऐसे समाधान पेश करने चाहिए जो बड़े पैमाने पर असर डाल सकें।
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