अजय दीक्षित
कांग्रेस 2014 अब तक तीन आम चुनाव 2014,2019,2024, और लगभग 81 राज्यों के विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी के नेतृत्व में हार चुकी है। 2004 से संसद सदस्य, अविवाहित , गांधी , नेहरू परिवार के बारिस, 52 वर्षीय राहुल गांधी इस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं । उनके पिता के मित्र सैम पित्रोदा कहते हैं कि राहुल गांधी में असीमित क्षमता है लेकिन माध्यम नहीं है। हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर कहते हैं कि वह इतने चुनाव हारने के बाद भी राजनीतिक मैदान में डटे हुए हैं। जबकि प्रशांत किशोर कहते हैं कि राहुल एक दिन इस देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ परिवार उन्हें अपरिपक्व व्यक्ति मानता है जिसे कांस्टेबल की योग्यता होने के बाबजूद आईएएस की परीक्षा में बिठाया जा रहा है। लेकिन यह सत्य है कि आज के दिनांक में कांग्रेस के पास उनका कोई विशेष विकल्प नहीं है। बिहार विधानसभा चुनावों में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का राहुल गांधी के कारण एक विभाजन हो सकता है। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां जैसे राजद, तुड़मूल कांग्रेस, डीएमके,आप, समाजवादी पार्टी, और कांग्रेस के अंदर कई वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के फैसलों से हड़प्रभ हो जाते हैं और तो और उनकी बहन , प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खडग़े भी कभी कभी असहज हो जाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक फैसला तो उन्होंने कागज फाड़ कर बापिस करा दिया था। उनके पर नाना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू,एक संपूर्ण राजनेता थे और आजादी के पहले और बाद में भारत के नीत निर्धारक, निर्माता,रहे ।राहुल गांधी की दादी स्व श्रीमती इंदिरा गांधी,पिता राजीव गांधी देश के वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे पूरा कुनवा 43 वर्ष प्रधानमंत्री रहा है और राहुल गांधी भी 2009 में ही प्रधानमंत्री बन सकते थे अगर उनकी मां सोनिया गांधी का सोच राजनीतिक होता तो।
कांग्रेस अध्यक्ष पद की बात करें तो जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू 1925,1929,1931, में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। जवाहर लाल नेहरू तो आजन्म ,दादी स्व श्रीमती इंदिरा गांधी 17 वर्ष, राजीव गांधी 10 वर्ष, मां सोनिया गांधी 17 वर्ष और वे स्वयं भी अध्यक्ष पद पर आसीन रहे।कुल मिलाकर राहुल गांधी की लेंगेसी बहुत बड़ी है। लेकिन राहुल गांधी अब तक ऐसी दशा उत्पन्न नहीं कर पाए है कि उन्हें गांधी नेहरू परिवार का राजनीतिक बारिस माना जा सके अब तक वे बायोलॉजिकल बारिस ही हैं। हालांकि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है फिर भी राजनीतिक कुनबे हैं जिनमें डीएमके के स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव, प्रमुख है। लेकिन राहुल गांधी पर बहुत बड़ी लीगेसी है। यद्यपि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है 880 मिलियन वोटर है पूरे देश में वे विभिन्न धर्मों, सम्प्रदाय, क्षेत्रों के है । संस्कृति भी भिन्न है और प्रत्येक 200 किलोमीटर से भाषा, बोली, रहन सहन बदल जाता है। ऐसे में पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर तक राजनेता होना बड़ी मुश्किल का काम है। राहुल गांधी के पर नाना जवाहरलाल नेहरू को पूरे देश में यह मुकाम हासिल हुआ वे दक्षिण भारत में भी लोकप्रिय थे और पूर्वोत्तर राज्यों में भी उनकी लोकप्रियता थी हिंदी पट्टी में भी समान रूप लोकप्रिय थे उनके बाद राहुल गांधी की दादी स्व श्रीमती इंदिरा गांधी भी अपने पिता की भांति लोकप्रिय थी ।कुछ हद राजीव गांधी भी लोकप्रिय रहे।
लेकिन राहुल गांधी इस श्रृंखला के सबसे कमजोर कड़ी है। वे कांग्रेस को एक भी बार सत्ता में नहीं ला सके है । आज के समय वे लोकसभा चुनावों में 200 सीट भी कांग्रेस को दिलवा दे तो प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन अभी उनके लिए दिल्ली दूर ही है । राज्यों में कांग्रेस सरकार नहीं है क्योंकि राहुल गांधी में वे जादू नहीं हैं जो कभी इंदिरा गांधी में हुआ करते थे। केवल कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश में सरकार है।जबकि भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर मेघालय मिजोरम सिक्किम,असम, नागालैंड, गोवा,में सरकारें है। बिहार विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी की भूमिका की चर्चा हो रही है क्योंकि इन चुनावों कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। केवल छह सीट ही जीत सकी है। गठबंधन निपुणता का अभाव राहुल गांधी में देखा गया।
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