नई दिल्ली, 20 नवम्बर (आरएनएस)। प्रगति मैदान में चल रहे 44वें भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में दर्शकों को राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद राजस्थान मंडप व फूड कोर्ट की ओर खूब ही आकर्षित कर रहा है। राजस्थान मंडप के निदेशक हर्ष शर्मा ने बताया की इस वर्ष राजस्थान मेले में पार्टनर स्टेट की भूमिका निभा रहा है। इसलिए मंडप में हमने राजस्थान की सभी क्षेत्रीय पहचानों को जगह देने की कोशिश की है। मंडप में मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाढ, हाडोती और शेखावाटी के क्षेत्रीय खानपान लोगों को खूब लुभा रहे हैं। राजस्थान की तिल पापड़ी, गजक, बीकानेर के मशहूर पापड़, नमकीन-भुजिया, भेलपुरी, आचार, डिब्बा बंद मिष्ठान, कुल्फी, मुरब्बा, चूर्ण, मसाले, राजजीरा, सूखे मेवा, सूखी सब्जियां और कैर सांगरी आगंतुकों को खूब पसंद आ रहे है। उनहोंने बताया कि श्रीगंगानागर, नागौर, जयपुर, एवं किशनगढ़ आदि विभिन्न अंचलों से आए कारीगरों ने अपने फूड स्टाॅल्स पर विभिन्न व्यंजन तैयार कर जनता के समक्ष परोसा। उनके द्वारा बनाए जा रहे पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों दाल-बाटी-चूरमा, बेसन के गट्टे, प्याज की कचैरी, मूंग की दाल की कचैड़ियों, मिर्ची बड़ा, कैर-सांगरी की सब्जी, लहसुन की चटनी से सजी राजस्थानी थाली की खूब बिक्री हो रही है। मंडप में मसालेदार और तीखे स्वाद के साथ ही शर्बत, चटनी, पैक्ड फूड आइटम, गजक, रेवड़ियाँ, चिक्की, हींग, पापड़, एवं पेय पदार्थों में जीरा सोडा इत्यादि आकर्षण का केंद्र रहे। इसी प्रकार प्रदेश के मशहूर हींग और हींग से बने उत्पादों के साथ नींबू चटनी, अथाना मिर्च को भी आगंतुक पसंद कर रहे हैं। राजस्थान के विभिन्न स्टाॅलों पर खाद्य-वस्तुओं की उल्लेखनीय बिक्री इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की यह स्वाद-परंपरा आज भी उतनी ही प्रभावशाली और प्रासंगिक है। देश-भर से आए आगंतुकों द्वारा परंपरागत रेसिपी पर आधारित इन उत्पादों को मिली व्यापक सराहना यह दर्शाती है कि राजस्थान न केवल अपने ऐतिहासिक वैभव से, बल्कि अपने अनूठे स्वाद और गुणवत्ता से भी पूरे देश को जोड़ने और प्रभावित करने की क्षमता लगातार बनाए हुए है।
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