भोपाल 20 नवंबर (आरएनएस)।मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में लगातार सामने आ रही घोर लापरवाही की घटनाओं पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इससे पहले भी ऐसी ही लापरवाही के कारण जहरीले कफ सिरप से 24 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, फिर भी प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुली। प्रदेश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य संस्था एमवाय को जीवन दायिनी के बजाय मौत का अड्डा बना दिया गया है।
पटवारी ने कहा कि नेशनल खिलाड़ी को एमवाय हॉस्पिटल के मेडिसिन वार्ड में तीन माह पहले एक्सपायर हो चुकी एंटीबायोटिक फ्लूड चढ़ा दी गई। जब उनके पति ने दवा की एक्सपायरी डेट पूछी तो ड्यूटी पर तैनात नर्स ने बेहयाई से कहा एक्सपायरी दवा कुछ दिन चलती है। यह जवाब न सिर्फ अमानवीय मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
स्थानीय मीडिया की पड़ताल में यह भी सामने आया कि अस्पताल में अनेक मरीजों को एक्सपायरी स्लाइन चढ़ाई जा रही थी। मामला टीवी व सोशल मीडिया पर उजागर होने के बाद ही हड़कंप मचा और स्टोर रूम से एक्सपायरी स्लाइन व अन्य दवाएँ निकालकर नष्ट करने की औपचारिकता में हड़बड़ी शुरू हुई। यह कार्रवाई दुर्घटना के बाद ब्रेक लगाने जैसा है, जो जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश ज्यादा और सुधार की कोशिश कम लगती है।
यही एमवाय अस्पताल इससे पहले भी वार्डों में चूहों द्वारा नवजात शिशुओं व मरीजों को काटने, खराब मशीनों, गंदगी, बेड की कमी और स्टाफ की अनुपस्थिति जैसे मामलों के कारण बदनाम रहा है। इसके बावजूद सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, जिसका नतीजा आज भी मरीजों को अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर झेलना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से सवाल करते हुए पटवारी ने कहा,यह कोई साधारण चूक नहीं, यह प्रदेश की बीजेपी सरकार और स्वास्थ्य तंत्र की सिस्टमेटिक नाकामी है। जहरीले कफ सिरप से 24 मासूम बच्चों की मौत हो या अब एक्सपायरी दवा और स्लाइन चढ़ाने की घटनाएँ – यह सब मिलकर सरकार की संवेदनहीनता का भयावह चेहरा सामने लाते हैं। एक्सपायरी दवा और स्लाइन चढ़ाना सीधा–सीधा ‘हत्या के प्रयासÓ की श्रेणी में आता है। जो व्यवस्था खिलाड़ी, किसान, मजदूर, आम नागरिक और मासूम बच्चों की जान की सुरक्षा तक नहीं कर सकती, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने सीधे सवाल उठाते हुए कहा,स्वास्थ्य मंत्री जी जवाब दें– इन बिगड़ते हालातों का जिम्मेदार कौन है? कौन बताएगा कि 24 मासूम बच्चों की जान जाने के बाद भी सिस्टम में सुधार क्यों नहीं हुआ? आखिर किसके दबाव में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही?
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाए कि एमवाय जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दवाओं की एक्सपायरी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है?
स्टोर इंचार्ज, अधीक्षक, ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब तक चुप क्यों थे?
वार्डों में चूहों द्वारा मरीजों को काटने, ऑक्सीजन की कमी और अब एक्सपायरी दवाओं के बावजूद भी एक भी बड़े अधिकारी पर कड़ी, दिखने वाली कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
24 मासूम बच्चों की मौत के बाद कितने जिम्मेदार अधिकारियों पर केस दर्ज हुए, कितनों को सस्पेंड किया गया और कितनों को पद से हटाया गया–क्या सरकार यह रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी?
पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जघन्य लापरवाही पर समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कड़ी सज़ा सुनिश्चित नहीं की, तो मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी प्रदेश भर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी। एमवाय अस्पताल सहित पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर जनता के सामने लाई जाएगी और हर पीडि़त परिवार की आवाज़ को सड़क से सदन तक बुलंद किया जाएगा।
पटवारी ने कहा,हमारी लड़ाई किसी एक अस्पताल से नहीं, उस सोच से है जिसने स्वास्थ्य को भी ठेकेदारी, भ्रष्टाचार और लापरवाही के भरोसे छोड़ दिया है।
कांग्रेस पार्टी हर पीडि़त परिवार के साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक संघर्ष करती रहेगी। हम स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही, पारदर्शिता और मानवता की बहाली तक अपनी आवाज़ बुलंद रखते हुए सरकार से जवाब मांगते रहेंगे।

